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News Samvad : नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने सोमवार को कक्षा 8 की नई सोशल साइंस की किताब जारी की है। इस बार किताब में सिर्फ न्यायपालिका की भूमिका ही नहीं समझाई गई, बल्कि उससे जुड़ी चुनौतियों पर भी साफ-साफ चर्चा की गई है। खास बात यह है कि पहली बार “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” और अदालतों में लंबित मामलों जैसे मुद्दों को सीधे तौर पर शामिल किया गया है, जो पहले की किताबों में नहीं था।
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर भी चर्चा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” नाम के अध्याय में बताया गया है कि अदालतों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसमें यह भी लिखा है कि न्यायपालिका के अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार की घटनाएं सामने आती रही हैं।
किताब का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि न्याय व्यवस्था सिर्फ आदर्श रूप में ही नहीं होती, बल्कि उसे कई व्यावहारिक चुनौतियों से भी जूझना पड़ता है।
लंबित मामलों का भारी बोझ
नई किताब में अदालतों में लंबित मामलों के आंकड़े भी दिए गए हैं, ताकि छात्रों को न्याय प्रणाली पर पड़ने वाले दबाव का अंदाजा हो सके।
सुप्रीम कोर्ट में करीब 81,000 मामले लंबित
हाई कोर्ट में लगभग 62,40,000 मामले लंबित
जिला और अधीनस्थ अदालतों में करीब 4,70,00,000 मामले लंबित
इसके पीछे जजों की कमी, कानूनी प्रक्रिया का जटिल होना और अदालतों में बुनियादी ढांचे की कमी जैसे कारण बताए गए हैं।
जजों की जवाबदेही और शिकायत की प्रक्रिया
किताब में यह भी बताया गया है कि जज एक आचार संहिता से बंधे होते हैं और उन्हें अदालत के अंदर-बाहर दोनों जगह सही व्यवहार करना होता है।
अगर किसी जज के खिलाफ शिकायत होती है तो उसकी जांच की व्यवस्था मौजूद है। इसके लिए CPGRAMS (Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System) का जिक्र किया गया है। किताब के अनुसार 2017 से 2021 के बीच 1,600 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई थीं।
अगर आरोप बहुत गंभीर हों तो संसद महाभियोग की प्रक्रिया के जरिए जज को हटा सकती है, जिसमें पूरी जांच और जज को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है।
पूर्व CJI का बयान भी शामिल
किताब में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के जुलाई 2025 के बयान का जिक्र किया गया है। उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भी भ्रष्टाचार और गलत आचरण के मामले सामने आए हैं, जिससे जनता का भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने पारदर्शी और सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया था।
पुरानी किताब से क्या अलग है?
पुरानी किताब में न्यायपालिका की संरचना, स्वतंत्रता और लोगों की पहुंच के बारे में जानकारी थी, लेकिन भ्रष्टाचार का सीधा उल्लेख नहीं था। हां, यह जरूर बताया गया था कि मामलों के निपटारे में कई साल लग जाते हैं और “Justice delayed is justice denied” का मतलब समझाया गया था।
नई किताब में अब ज्यादा वास्तविक और समकालीन उदाहरण जोड़ दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के उदाहरण से समझाया गया कानून
छात्रों को समझाने के लिए किताब में दो अहम मामलों पर चर्चा करने को कहा गया है:
चुनावी बॉन्ड योजना – 2018 में शुरू इस योजना को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताया और कहा कि मतदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि राजनीतिक पार्टियों को पैसा कौन दे रहा है।
आईटी एक्ट का प्रावधान – एक ऐसा नियम जो सोशल मीडिया पोस्ट पर जेल की सजा का रास्ता खोलता था। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हुए हटा दिया।
छात्रों से पूछा गया है कि इन मामलों में अदालत ने क्या किया और क्यों किया।
नई शिक्षा नीति के तहत तैयार हुई किताबें
NCERT नई शिक्षा नीति 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के आधार पर नई किताबें तैयार कर रहा है। अब तक कक्षा 1 से 8 तक की किताबें जारी की जा चुकी हैं।
पुरानी किताबें 2005 के करिकुलम पर आधारित थीं, जिन्हें कोविड महामारी के बाद “रैशनलाइज” कर सिलेबस कम किया गया था।
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