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News Samvad : भारत में पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से परेशान आम जनता के लिए एक बहुत ही राहत भरी और चौंकाने वाली खबर आई है। हमारे देश के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनोखा तरीका ढूंढ निकाला है जिससे देश का खजाना भी बचेगा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला प्लास्टिक का कचरा भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक कचरे को सीधे पेट्रोल और डीजल में बदल दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह नया ईंधन मात्र 32 रुपये प्रति लीटर की कीमत में तैयार हो जाएगा और गाड़ी का माइलेज भी बिल्कुल सामान्य पेट्रोल जैसा ही रहेगा। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले में वैज्ञानिकों ने क्या कमाल किया है और यह कैसे काम करता है।
कचरे से बना ईंधन और वडोदरा का कमाल
इस पूरी खोज का श्रेय वडोदरा में मौजूद गति शक्ति विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को जाता है। इन वैज्ञानिकों ने मिश्रित प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस करके उसे बेहतरीन ईंधन में बदलने में सफलता हासिल की है। यह खोज इसलिए भी खास है क्योंकि भारत हर साल दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदने में अरबों रुपये खर्च करता है। इस नए ईंधन के आ जाने से विदेशों पर हमारी निर्भरता बहुत कम हो जाएगी और देश का पैसा देश में ही बचेगा।
इंजन बदलने का झंझट खत्म, परीक्षण रहा सफल
कई लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या प्लास्टिक से बने पेट्रोल को गाड़ी में डालने के लिए इंजन को बदलना पड़ेगा? वैज्ञानिकों ने इसका जवाब पहले ही ढूंढ लिया है। देश की एक बड़ी टू-व्हीलर कंपनी की तीन मोटरसाइकिलों में इस नए ईंधन को डालकर टेस्ट किया गया। जांच में सामने आया कि इसके लिए बाइक के इंजन में कोई भी बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ी। माइलेज के मामले में भी इसने सबको चौंका दिया। जिस 100 सीसी की बाइक ने सामान्य पेट्रोल से 62 किलोमीटर का माइलेज दिया था, उसी बाइक ने प्लास्टिक वाले इस पेट्रोल से पूरे 60 किलोमीटर का सफर तय किया। यही नहीं, इस ईंधन से निकलने वाला धुआं भी तय मानकों के अंदर पाया गया और इन गाड़ियों को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पीयूसी भी मिल गया।
100 किलो कचरे से 50 किलो तेल
वैज्ञानिकों के मुताबिक इस तेल को बनाने का गणित बहुत सीधा है। 100 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल और प्रोसेस करके लगभग 50 किलोग्राम ईंधन आसानी से निकाला जा सकता है। जब यह तेल कच्चा होता है तो इसकी लागत केवल 24 रुपये प्रति लीटर आती है। इसके बाद जब इसे गाड़ियों में डालने के लिए पूरी तरह रिफाइन यानी अपग्रेड किया जाता है, तो इसकी कुल कीमत लगभग 32 रुपये प्रति लीटर बैठती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तेल 90 प्रतिशत तक बिल्कुल असली पेट्रोल-डीजल जैसा ही है।
अब प्लास्टिक से उड़ेंगे हवाई जहाज
इस खोज की कामयाबी को देखते हुए दुनिया की मशहूर विमान निर्माता कंपनी एयरबस ने भी गति शक्ति विश्वविद्यालय के साथ हाथ मिला लिया है। अब वैज्ञानिक इस कोशिश में जुटे हैं कि क्या इसी तकनीक का इस्तेमाल करके हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाला जेट फ्यूल भी बनाया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह विमानन क्षेत्र में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम होगा।
पहाड़ों और सेना के कैंपों से होगी शुरुआत
इस नए प्लास्टिक पेट्रोल को सबसे पहले उन इलाकों में बनाने की योजना है जहां प्लास्टिक कचरे को ठिकाने लगाना बहुत बड़ी समस्या है और जहां भारी बर्फबारी या मुश्किल रास्तों के कारण पेट्रोल-डीजल पहुंचाना बेहद कठिन होता है। इसके लिए लेह, लद्दाख, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे पहाड़ी इलाकों को चुना गया है। इसके साथ ही झांसी के रेलवे लोकोमोटिव शेड और कोलकाता के सैन्य छावनी इलाकों में भी इस तकनीक को शुरू करने की तैयारी है। इस समय सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों में इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए बातचीत चल रही है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आने वाले समय में यह तकनीक भारत की किस्मत और पर्यावरण दोनों को बदल कर रख देगी।
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