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Varanasi : साइबर अपराध को अक्सर तकनीकी जानकारी और ऊंची शिक्षा से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की जांच में जो तस्वीर सामने आई है, उसने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। पिछले दो वर्षों में साइबर अपराध के आरोप में गिरफ्तार किए गए 103 लोगों में से करीब 30 प्रतिशत ऐसे निकले जो या तो अनपढ़ थे या फिर बहुत कम पढ़े-लिखे थे। इसके बावजूद उन्होंने मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, फर्जी लिंक और नकली वेबसाइटों के जरिए बड़ी संख्या में शिक्षित लोगों को ठगी का शिकार बनाया।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन अपराधियों ने डॉक्टर, शिक्षक, व्यापारी, नौकरीपेशा और अन्य पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी की। कई लोगों के बैंक खाते खाली हो गए तो कई की वर्षों की मेहनत की कमाई कुछ ही मिनटों में गायब हो गई।
डिग्री नहीं, चालाकी और तकनीक का गलत इस्तेमाल बना हथियार
जांच में सामने आया कि साइबर ठगी करने वालों में कुछ बिल्कुल अनपढ़ थे, जबकि कई सिर्फ पांचवीं तक पढ़े थे। कुछ आरोपी दसवीं की पढ़ाई के बाद ही अपराध की दुनिया में उतर गए। इन लोगों ने अलग-अलग राज्यों में सक्रिय साइबर गिरोहों से संपर्क किया और ठगी के नए तरीके सीखे।पुलिस के मुताबिक, झारखंड, ओडिशा, दिल्ली और राजस्थान में जाकर कई आरोपियों ने तीन से छह महीने तक प्रशिक्षण लिया। इस दौरान उन्हें लोगों को झांसे में लेने, बातचीत के जरिए भरोसा जीतने और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी हासिल करने के तरीके सिखाए गए। कुछ आरोपियों ने लोगों की मानसिकता समझने और उन्हें प्रभावित करने के लिए ब्रेन मैपिंग की भी ट्रेनिंग ली।
जहां जगह मिली, वहीं बना लिया ठगी का अड्डा
पूछताछ में यह भी सामने आया कि कई आरोपी किसी स्थायी कार्यालय से काम नहीं करते थे। वे लैपटॉप, मोबाइल फोन और बैटरी बैकअप लेकर ऐसी जगहों पर बैठ जाते थे जहां इंटरनेट की सुविधा मिल जाए। वहीं से लोगों को कॉल करना और फर्जी संदेश भेजना शुरू कर देते थे।इन अपराधियों ने क्रेडिट कार्ड अपडेट, केवाईसी वेरिफिकेशन, बिजली बिल भुगतान, गिफ्ट ऑफर और नकली वेबसाइटों के जरिए लोगों को जाल में फंसाया। एक मामले में 30 हजार रुपये की ठगी की गई तो कई मामलों में रकम एक लाख रुपये से अधिक पहुंच गई।
सोशल मीडिया और मोबाइल बना सबसे बड़ा हथियार
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों ने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। वे बड़े गिरोहों से बड़ी संख्या में मोबाइल नंबर खरीदते थे या हासिल करते थे। इसके बाद एक ही दिन में 35 से 45 लोगों को कॉल करके उन्हें झांसे में लेने की कोशिश करते थे।इंटरनेट और मोबाइल एप की मदद से ठगी के नए-नए तरीके सीखकर ये अपराधी लगातार अपने तरीकों में बदलाव भी करते रहे। यही वजह है कि कई बार पढ़े-लिखे लोग भी इनके जाल में फंस गए।
फर्जी केवाईसी अपडेट सबसे बड़ा हथकंडा
साइबर अपराधियों द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल किया गया तरीका फर्जी केवाईसी अपडेट का रहा। आरोपी खुद को बैंक या मोबाइल कंपनी का कर्मचारी बताकर लोगों को फोन करते थे। वे खाते या सिम कार्ड बंद होने का डर दिखाते और फिर केवाईसी अपडेट के नाम पर जरूरी जानकारी हासिल कर लेते थे।इसके अलावा क्रेडिट कार्ड रिवार्ड प्वाइंट, गिफ्ट ऑफर और कैशबैक का लालच देकर भी लोगों से बैंकिंग जानकारी और ओटीपी हासिल किए जाते थे।
केस-1: शिक्षक और कारोबारी से 42 लाख की ठगी
इस वर्ष फरवरी महीने में सामने आए 42 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में साइबर पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों में तीन अनपढ़ थे। पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह ने एक शिक्षक और एक कारोबारी को निशाना बनाकर उनसे 42 लाख रुपये की ठगी की थी।
केस-2: विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी
बीते वर्ष पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था जो गल्फ देशों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे वसूलता था। इस गिरोह में दो महिलाएं भी शामिल थीं। जांच के दौरान पता चला कि दोनों महिलाओं ने दसवीं तक की पढ़ाई भी पूरी नहीं की थी, लेकिन वे लोगों को नौकरी का भरोसा देकर ठगी करती थीं।
केस-3: फर्जी जमानतदार बनकर दिलाते थे जमानत
एक अन्य मामले में पुलिस ने ऐसे गिरोह को पकड़ा था जो साइबर अपराधियों को फर्जी जमानतदार बनकर जमानत दिलाने का काम करता था। गिरोह के सदस्य लेटर पैड, थाने की मोहर और फर्जी आधार कार्ड तैयार कर अदालत में पेश करते थे। इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों में दो अनपढ़ थे।
पुलिस की अपील: सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा तरीका
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अब शिक्षा नहीं, बल्कि लोगों की लापरवाही और जल्दबाजी का फायदा उठा रहे हैं। इसलिए किसी भी अनजान कॉल, लिंक या संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच जरूर करें।बैंक, मोबाइल कंपनी या सरकारी विभाग कभी भी फोन पर ओटीपी, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी नहीं मांगते। ऐसे में किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश से सतर्क रहना ही साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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