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Bharuch : अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। करीब 110 दिनों की अनिश्चितता के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) से भरा पहला टैंकर गुजरात के भरूच जिले स्थित दहेज एलएनजी टर्मिनल पहुंच गया है। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरा कदम माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, जहाज अपने साथ 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी लेकर आया है। टैंकर के दहेज टर्मिनल पहुंचते ही गैस को उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पिछले कई महीनों से होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई थी। ऐसे में इस खेप का सुरक्षित भारत पहुंचना सरकार और ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्ग
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक ऊर्जा व्यापार मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है। जब इस मार्ग पर तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होता है और तेल-गैस की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए होर्मुज मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर देश की ऊर्जा आपूर्ति और लागत पर पड़ता है। अब मार्ग खुलने से भारत को बड़ी राहत मिली है।
ईरान ने तेज की मंजूरी प्रक्रिया
इस बीच ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएनएससी) ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के आवागमन से जुड़ी सभी मंजूरियों और अपीलों के त्वरित निपटारे का निर्देश दिया है। यह फैसला ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद लिया गया है। समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस अवधि के दौरान सभी खर्चों का वहन ईरान सरकार करेगी। जहाजों को अपने आवागमन संबंधी अनुरोध पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) को भेजने होंगे, जो पूरी प्रक्रिया का समन्वय करेगी।
भारत समेत कई देशों को होगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात सामान्य होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी। इससे एलएनजी और कच्चे तेल की आपूर्ति सुचारु होगी तथा कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं भी कम होंगी।
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