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Patna : बिहार में एक कुत्ते का आवासीय प्रमाण पत्र बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह आवासीय प्रमाण पत्र ‘डॉग बाबू’ के नाम से बनाया गया है। वैसे तो आम तौर पर एक इंसान को जातीय-आवासीय प्रमाण-पत्र बनवाने में पसीने छूट जाते हैं, वहीं एक कुत्ते के नाम से फर्जी निवास प्रमाण-पत्र बड़ी आसानी से बना दिया गया है। यह मामला राजधानी के मसौढ़ी अंचल से सामने आया है। इस मामले में पटना जिला प्रशासन ने फौरी कार्रवाई करते हुए एक कर्मचारी को जेल भेज दिया है और एक अधिकारी के निलंबन की सिफारिश की है।
DM डॉ. त्यागराजन एसएम ने मसौढ़ी के प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय का दौरा कर इस मामले की गहन जांच की। जांच में पता चला कि अंचल कार्यालय के कार्यपालक सहायक मींटु कुमार निराला ने 15 जुलाई 2025 को सुबह 9:41 बजे कुत्ते की तस्वीर के साथ फर्जी आवेदन अपलोड किया था। मींटु ने ही इस प्रमाण-पत्र को सबसे पहले एक्सेस भी किया। DM ने उन्हें तुरंत जेल भेजने और बर्खास्त करने का आदेश दिया है। साथ ही, इस मामले में उनकी मंशा और अन्य संलिप्त लोगों की जांच जारी है।
जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली की एक महिला के आधार कार्ड का दुरुपयोग कर यह फर्जी आवेदन किया गया। बिना सत्यापन के प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए राजस्व अधिकारी मुरारी चौहान को भी दोषी पाया गया, जिनके निलंबन की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, एक आईटी सहायक को सेवा से हटा दिया गया है।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत FIR की गई है। ‘डॉग बाबू’ के नाम से बने फर्जी प्रमाण-पत्र को रद्द कर दिया गया है। बिहार प्रशासन ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि दस्तावेजों का सत्यापन कड़ाई से हो। भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए NIC के सर्विस प्लस पोर्टल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करने की योजना भी बनाई जा रही है।
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