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News Samvad : कर्नाटक की राजनीति को हिलाकर रख देने वाले चर्चित सेक्स स्कैंडल मामले में अदालत ने पूर्व सांसद और जेडीएस नेता प्रज्वल रेवन्ना को दोषी करार देते हुए दो मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने रेवन्ना पर 11 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
कैसे हुआ खुलासा?
यह मामला पहली बार तब सामने आया, जब एक महिला ने प्रज्वल रेवन्ना पर रेप, यौन उत्पीड़न, धमकी और साइबर अपराध जैसे गंभीर आरोप लगाए। इस केस में सबसे अहम सबूत बनी पीड़िता की साड़ी, जिसे उसने घटना के बाद संभाल कर रखा था। फोरेंसिक जांच में साड़ी पर स्पर्म के निशान पाए गए, जिससे अदालत को पुख्ता सबूत मिला। इसके अलावा, पीड़िता ने वीडियो रिकॉर्डिंग भी पेश की, जिसमें आरोपी प्रज्वल का चेहरा साफ दिखाई दे रहा था।
वीडियो कॉल पर अश्लील हरकतें
पीड़िता ने अदालत को बताया कि 2020–2021 के दौरान, रेवन्ना उसे वीडियो कॉल पर अश्लील हरकतों के लिए मजबूर करता था। जब उसने मना किया, तो रेवन्ना ने धमकी दी कि वह उसके पिता की नौकरी छीन लेगा और मां-बेटी का जीवन बर्बाद कर देगा। इतना ही नहीं, वह पीड़िता की मां के फोन पर कॉल कर बेटी को वीडियो कॉल उठाने के लिए मजबूर करता था।
पीड़िता की मां के साथ भी रेप का आरोप
इस मामले में पीड़िता की मां ने भी चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के बसवनगुड़ी स्थित घर में उनके साथ भी रेप किया गया। इस घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।
नौकरानियों का भी यौन शोषण
पीड़िता ने आगे आरोप लगाया कि रेवन्ना परिवार ने घरेलू नौकरानियों के साथ भी अश्लील हरकतें कीं। परिवार में काम करने वाली छह महिलाओं में से तीन नौकरानियों ने आगे आकर बयान दिए कि उनके साथ भी यौन शोषण हुआ। पीड़िता ने कहा, “हमें गुलामों की तरह रखा गया, डराया गया, और चुप रहने को मजबूर किया गया।”
पूरे परिवार पर गंभीर आरोप
पीड़िता ने दावा किया कि यह एक व्यक्ति का नहीं, पूरे परिवार का शोषण करने का इतिहास है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रज्वल रेवन्ना के पिता एचडी रेवन्ना भी इसमें शामिल रहे हैं।
परिवार को झेलनी पड़ी परेशानियां
पीड़िता ने कहा कि परिवार को केस लड़ने के लिए जमीन बेचनी पड़ी, पिता की नौकरी चली गई, और मां को घर छोड़ना पड़ा। केस दर्ज होने के बाद, उन्हें धमकियां और पैसे का लालच देकर केस वापस लेने का दबाव डाला गया।
कोर्ट का कड़ा संदेश
इस ऐतिहासिक फैसले के जरिए अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से कोई ऊपर नहीं है, चाहे वो कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो। कोर्ट का यह फैसला पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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