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Ranchi : आज के दौर में बच्चों के हाथ में किताबों के साथ मोबाइल भी है। इंटरनेट की दुनिया जितनी सुविधाएं देती है, उतने ही खतरे भी अपने साथ लेकर आती है। दूसरी ओर नशे का जाल युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है और सड़क पर छोटी-सी लापरवाही बड़े हादसों की वजह बन रही है। इन्हीं गंभीर मुद्दों को लेकर शुक्रवार को डीपीएस स्कूल, जगन्नाथपुर में एक खास जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बच्चों से सीधे संवाद किया और उन्हें जिंदगी से जुड़े कई अहम सबक सिखाए। कार्यक्रम में ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह, ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी, ट्रैफिक डीएसपी और हटिया डीएसपी नीरज कुमार मौजूद रहे। अधिकारियों ने बच्चों को सिर्फ कानून की जानकारी नहीं दी, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाले खतरों और उनसे बचने के उपाय भी समझाए।

“हर मैसेज और हर लिंक पर भरोसा मत करिए”
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराध का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। अधिकारियों ने बच्चों को बताया कि आजकल ठग मोबाइल फोन के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। कभी फर्जी लिंक भेजकर, कभी लॉटरी का लालच देकर तो कभी दोस्त बनकर लोगों की निजी जानकारी हासिल की जाती है। बच्चों को समझाया गया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचें और ओटीपी, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराधी अब सिर्फ बड़ों को ही नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं को भी निशाना बना रहे हैं।
नशे की शुरुआत मजाक में, लेकिन अंजाम गंभीर
रूरल एसपी गौरव गोस्वामी ने नशे के बढ़ते खतरे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार युवा सिर्फ जिज्ञासा या दोस्तों के कहने पर नशे की शुरुआत करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत जिंदगी की सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है। अधिकारियों ने बच्चों से कहा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह पढ़ाई, करियर, परिवार और स्वास्थ्य सब कुछ प्रभावित करता है। बच्चों को यह भी बताया गया कि यदि आसपास कहीं नशे का कारोबार या सेवन होता दिखाई दे तो इसकी जानकारी पुलिस को जरूर दें।

बेटियों और बच्चों की सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी
कार्यक्रम में महिला और बाल सुरक्षा के विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बच्चों को बताया कि किसी भी तरह की गलत हरकत, धमकी या उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों को समझाया गया कि यदि कभी कोई व्यक्ति उन्हें असहज महसूस कराए तो तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या पुलिस से संपर्क करें। अधिकारियों ने कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है और बच्चों को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए।
हेलमेट और सीट बेल्ट कोई औपचारिकता नहीं
सड़क सुरक्षा पर बात करते हुए ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने कहा कि ज्यादातर हादसे लापरवाही के कारण होते हैं। बाइक चलाते समय हेलमेट और कार में सीट बेल्ट लगाना सिर्फ नियम नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का सबसे आसान तरीका है। बच्चों से कहा गया कि वे खुद तो नियमों का पालन करें ही, साथ ही अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को भी ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें। अधिकारियों ने कई उदाहरण देकर बताया कि एक छोटी सी सावधानी किसी की जान बचा सकती है।

बच्चों ने पूछे सवाल, अधिकारियों ने दिए आसान जवाब
कार्यक्रम का सबसे दिलचस्प हिस्सा सवाल-जवाब का सत्र रहा। बच्चों ने साइबर फ्रॉड, सोशल मीडिया, नशे और ट्रैफिक नियमों से जुड़े कई सवाल पूछे। अधिकारियों ने भी सरल भाषा में उनके जवाब दिए और बच्चों की जिज्ञासाओं को शांत किया। इस दौरान बच्चों ने काफी उत्साह दिखाया और पूरे कार्यक्रम में गंभीरता के साथ भाग लिया।
सिर्फ पढ़ाई नहीं, जागरूकता भी जरूरी
स्कूल प्रबंधन ने कहा कि आज के समय में बच्चों को सिर्फ पाठ्य पुस्तकों का ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें समाज, कानून और सुरक्षा से जुड़े विषयों की जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने बच्चों से अपील की कि वे अच्छे नागरिक बनें, कानून का सम्मान करें, नशे से दूर रहें, साइबर दुनिया में सतर्क रहें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। बच्चों ने भी जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि बच्चों को सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने की एक सार्थक पहल साबित हुआ।
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