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Patna : पटना से सटे वैशाली जिले में बीते देर शाम पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में कुख्यात लुटेरा अरविंद सहनी एनकाउंटर में मारा गया। चिंतामणिपुर हाई स्कूल के पीछे स्थित एक बगीचे में यह मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान अरविंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से वह मौके पर ही ढेर हो गया। मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी के हाथ में गोली लगी, जबकि कुछ अन्य जवान भी घायल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इस दौरान करीब 20 राउंड गोलियां चलीं।
28 मई को समस्तीपुर कोर्ट से फरार हुआ था
अरविंद सहनी लूट, हत्या और डकैती जैसे 22 गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित था। 28 मई 2025 को वह समस्तीपुर कोर्ट से फरार हो गया था। उस दिन पेशी के बाद जब एक अपराधी हैदर को कोर्ट हवालात में ले जाया जा रहा था, तभी हवालात के अंदर मौजूद अरविंद समेत 4 कैदियों ने ग्रिल पर जोर से धक्का दिया। गार्ड गिर पड़ा और पांचों कैदी भाग निकले। पुलिस ने पीछा करके एक अपराधी नागेंद्र महतो को पकड़ लिया, लेकिन अरविंद, मनीष कुमार, मनजीत कुमार और हैदर फरार हो गए।
50 हजार रुपये का इनाम था घोषित
फरारी के बाद अरविंद ने मुजफ्फरपुर जिले में अपने साथियों के साथ किराना दुकानों में कई लूटपाट की घटनाओं को अंजाम दिया। इसके बाद मुजफ्फरपुर पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। उसके दो अन्य साथियों मोहम्मद अनवर और मंजीत कुमार पर 25-25 हजार रुपये का इनाम रखा गया।
10 दिन पहले भी पुलिस को चकमा दिया
3 अगस्त की रात पुलिस को सूचना मिली कि अरविंद करजा थाना क्षेत्र के भटौना लक्ष्मण चौक के पास अपने साथियों के साथ किसी बड़ी लूट की योजना बना रहा है। पुलिस घेराबंदी करने पहुंची, लेकिन अरविंद अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला। मौके से पुलिस ने बाइक, मैगजीन और कारतूस बरामद किए।
30 साल की उम्र में 22 बड़े मामले
अरविंद सहनी वैशाली थाना क्षेत्र के सहथा भगवानपुर गांव का रहने वाला था और उसकी उम्र 30 साल थी। वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण और मोतिहारी जिलों में उसके खिलाफ कई गंभीर केस दर्ज थे। वह 2019 में हाजीपुर के मुथूट फाइनेंस सोना लूटकांड (55 किलोग्राम सोना) और मुजफ्फरपुर बैंक लूट में भी वांछित था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में भी उसने बड़ी सोना लूट को अंजाम दिया था। इनाम घोषित होने के बावजूद वह लगातार वारदातें करता रहा, जिससे पुलिस के लिए उसे पकड़ना बड़ी चुनौती बन गया था। आखिरकार समस्तीपुर कोर्ट से फरार होने के 78 दिन बाद वह पुलिस और एसटीएफ के एनकाउंटर में मारा गया।
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