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Ranchi : राजधानी रांची के डोरंडा की मजिस्ट्रेट कॉलोनी का एक छोटा सा घर अब सन्नाटे से भरा है। इस घर का इकलौता सहारा रहे नकुल तिर्की अब नहीं रहे। बीते 21 अगस्त की दोपहर करीब एक बजे उनका निधन हो गया। पत्नी सरिता तिर्की का इल्जाम है कि उनके पति की मौत बीमारी से नहीं, बल्कि नगर निगम के चंद अधिकारियों की लापरवाही से हुई। नकुल तिर्की रांची नगर निगम में कर संग्रहकर्ता यानी टैक्स कलेक्टर थे। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सीएमसी वेल्लोर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। उनकी माली हालत बहुत बढ़िया नहीं थी, कि वे ऑपरेशन करवा सकें। सरिता ने उम्मीद लगाई थी कि पति की जमा की हुई छुट्टी मंजूर हो जाएगी और उससे मिलने वाले पैसों से इलाज हो जाएगा। मगर ऐसा हुआ नहीं।
सरिता की आंखों में आंसू भर आते हैं। वह बताती हैं… “डॉक्टरों ने सीएमसी वेल्लोर में तुरंत ऑपरेशन की सलाह दी थी। लेकिन हमारे पास पैसे नहीं थे। हमने सोचा कि पति का अर्जित अवकाश स्वीकृत हो जाएगा तो जो पैसा मिलेगा उससे इलाज करा लेंगे। लेकिन नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर फाइल दबा दी।” इसी उम्मीद में वे इलाज टालते रहे। थक-हार कर वेल्लोर से वापस रांची लौटे और पति नकुल को मेदांता ले गये। इस अस्पताल में भी पैसा इलाज के रास्ते का रोड़ा बना। अंततः पति को रिम्स में भर्ती कराया, लेकिन तबतक देर हो चुकी थी। 21 अगस्त की दोपहर 12 से 1 बजे के बीच उन्होंने इलाज के दरम्यान दम तोड़ दिया।
सरिता की आंखों से झर-झर आंसू गिरने लगते हैं जब वह अपने बच्चों की तरफ देखती हैं। उनके तीन बच्चे हैं। दो बेटी और एक बेटा। करीब 17 साल की बड़ी बेटी उर्सुलाइन कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ती है। 15 साल की छोटी बेटी लाला लाजपत राय की स्टूडेंट है। वहीं, 11 साल का बेटा फिरायालाल पब्लिक स्कूल में पढ़ता है। सरिता को अब अपने तीनों बच्चों के पढ़ाई-लिखाई से लेकर लालन-पालन की चिंता सता रही है। सरिता और बच्चों की दुनिया अचानक उजड़ गयी। उनके पास अब कोई जवाब नहीं है। सरिता बार-बार बस एक ही बात कहती हैं… “निगम के कुछ अधिकारियों की लापरवाही के कारण मेरे पति की जान गई। अगर समय पर उनका अवकाश स्वीकृत कर दिया जाता, तो मैं इलाज करा सकती थी।”
सरिता ने अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने और संवारने की खातिर 50 लाख रुपये मुआवजा, पारिवारिक पेंशन और अनुकंपा पर नौकरी की मांग की है। इन मांगों को लेकर सरिता आज रांची नगर निगम के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गयी है। सरिता की इस लड़ाई में निगम के कई कर्मचारी और आसपास के लोग उनका साथ दे रहे हैं।
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