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Patna : बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। पीएम मोदी की मां पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी, केरल कांग्रेस की एक विवादित पोस्ट और श्रीनगर में राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चिह्न के अपमान की घटनाओं ने पूरे देश में राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
डिप्टी सीएम का कड़ा बयान :
इन सभी घटनाओं पर बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा, “बिहार में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की माँ का अपमान… केरल में बिहार का अपमान… और अब कश्मीर में अशोक चक्र का अपमान! केरल से कश्मीर तक, INDI गठबंधन सिर्फ भारत की आत्मा पर वार कर रहा है। अशोक चक्र, सम्राट अशोक और बिहार की गौरवशाली विरासत है। बिहार और भारत कभी इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा!”
बिहार में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की माँ का अपमान…
केरल में बिहार का अपमान…
और अब कश्मीर में अशोक चक्र का अपमान!केरल से कश्मीर तक,INDI गठबंधन सिर्फ भारत की आत्मा पर वार कर रहा है।
अशोक चक्र,सम्राट अशोक और बिहार की गौरवशाली विरासत है।
बिहार और भारत कभी इस… pic.twitter.com/SMyv2WfZ2e— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) September 7, 2025
दरभंगा में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी
27 अगस्त को दरभंगा ज़िले के जाले में आयोजित वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कांग्रेस के स्थानीय नेता मोहम्मद नौशाद ने कथित तौर पर मंच से प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। भाजपा ने इस बयान की तीखी निंदा करते हुए इसे “माँ की गाली” बताया।
केरल कांग्रेस की पोस्ट से नया विवाद
इसके बाद 6 सितंबर को केरल कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट की गई, जिसमें बिहार को ‘बीड़ी’ से जोड़ा गया था। इस पोस्ट के सामने आते ही राजनीति में हलचल मच गई। आलोचना बढ़ने पर पार्टी ने पोस्ट को हटा दिया और सार्वजनिक माफ़ी भी मांगी, लेकिन तब तक यह मुद्दा गरम हो चुका था।
श्रीनगर में अशोक चिह्न का अपमान
इसी बीच जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित हजरतबल दरगाह परिसर में राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चिह्न के अपमान की खबर सामने आई। यह घटना भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है और कई संगठनों ने इसकी जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उनके इस बयान ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जहां भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति का सही कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी हथकंडा बता रहा है।
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