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News Samvad : “जय माता दी” के गगनभेदी नारों से बुधवार सुबह कटड़ा एक बार फिर गूंज उठा। 22 दिनों तक ठप रही माता वैष्णो देवी यात्रा आखिरकार फिर से शुरू हो गई। यह वही यात्रा है, जिसके बंद होने से लाखों श्रद्धालु मायूस हो गए थे। भूस्खलन की विभीषिका ने न केवल मार्ग को तहस-नहस कर दिया था बल्कि 34 मासूम जिंदगियां भी निगल ली थीं। 20 से अधिक लोग घायल हुए। हादसे ने देशभर के श्रद्धालुओं को झकझोर दिया था। लेकिन बुधवार की सुबह उम्मीद और आस्था की किरण लेकर आई।
कटड़ा में लौट आई रौनक
जैसे ही श्राइन बोर्ड ने यात्रा दोबारा शुरू करने का ऐलान किया, कटड़ा के होटल और बाजारों में रौनक लौट आई। पुणे से आई श्रद्धालु कविता देशमुख ने मुस्कुराते हुए कहा – “हम दो दिन से इंतजार कर रहे थे। मन में विश्वास था कि माता बुलाएंगी। आज जब यात्रा शुरू हुई तो आंसू निकल आए।” कटड़ा से भवन तक जाने वाले दोनों रास्ते खोल दिए गए। श्रद्धालुओं की भीड़ धीरे-धीरे ट्रैक पर बढ़ने लगी और हर चेहरा उम्मीद और श्रद्धा से चमक रहा था।
सुरक्षा और नियम सबसे अहम
इस बार बोर्ड ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हर यात्री को वैध पहचान पत्र और आरएफआईडी कार्ड दिखाना अनिवार्य है। इसके अलावा, सभी को केवल निर्धारित मार्गों का पालन करना होगा और ग्राउंड स्टाफ के निर्देशों का पालन करना होगा। श्राइन बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा – “यह यात्रा केवल दर्शन भर नहीं है, बल्कि यह सामूहिक विश्वास और धैर्य का प्रतीक है। हम श्रद्धालुओं की सुरक्षा और इस पवित्र स्थल की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
भूस्खलन के चलते 26 अगस्त से बंद थी यात्रा
यात्रा 26 अगस्त को रोकी गई थी। भूस्खलन से मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। जिन परिवारों ने अपने प्रिय खोए, उनके जख्म अभी भी ताजे हैं। बावजूद इसके, श्रद्धालुओं ने धैर्य दिखाया और विश्वास बनाए रखा। शायद यही आस्था है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी टूटती नहीं।
नवरात्रि पर उमड़ेगी भीड़
मार्ग सुरक्षित घोषित कर दिया गया है और अब 22 सितंबर से शुरू हो रहे नवरात्रि पर्व में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। हर साल नवरात्र पर लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं और इस बार यात्रा की पुनः शुरुआत इसे और भी खास बना देगी। माता वैष्णो देवी यात्रा का दोबारा शुरू होना उन लाखों दिलों की धड़कन है, जिनकी आस्था कभी डगमगाई नहीं। यह घटना बताती है कि जब विश्वास अटल हो, तो भूस्खलन जैसी बाधाएं भी मार्ग की धूल साबित होती हैं। “जय माता दी” के नारों के बीच श्रद्धालु जब भवन की सीढ़ियां चढ़ते हैं, तो मानो हर कदम पर उनकी थकान नहीं, बल्कि आस्था बोलती है।
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