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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के देवतल्ला गांव की खामोश गलियां अचानक बम के धमाकों से दहल उठी। यहां एएक छोटे पुलिया पर शुरू हुई मामूली कहासुनी ने पूरे गांव को दहशत और खामोशी में डुबो दिया।
विवाद की चिंगारी और पथराव
दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव था। छोटी-सी कहासुनी ने पुराने विवाद को फिर से जगा दिया। एक पक्ष ने अचानक पथराव शुरू कर दिया। पत्थरों की बरसात से बचते-बचाते गांव में अफरातफरी मच गई। लेकिन यह तो बस शुरुआत थी।
देसी बम का धमाका और चीख चित्कार
पथराव का जवाब देने के लिए दूसरे पक्ष ने देसी बम का सहारा लिया। धमाके की आवाज़ से गांव की चुप्पी टूट गई। लोग घरों से बाहर निकलने की बजाय दरवाज़े बंद कर दुबक गए। इसी बमबारी में मेतिउर रहमान समेत चार लोग घायल हो गए। रहमान के कान में गंभीर चोट आई, जिसे देखकर लोगों में और दहशत फैल गई।
घायल और अस्पताल का सन्नाटा
घायल मेतिउर को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया जबकि अन्य तीन लोगों को पाकुड़ सदर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में जब उन्हें लाया गया तो वहां सन्नाटा छा गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद सभी को घर भेज दिया, लेकिन रहमान की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
पत्नी की फरियाद और केस दर्ज
घटना के बाद पीड़ित की पत्नी शकीला बीवी ने मुफस्सिल थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कांड संख्या 229/25 दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। शकीला की फरियाद में गांव के डर और बेबसी की झलक साफ़ दिखाई दी।
गांव छोड़कर भागे कुछ लोग
इस हिंसा का असर इतना गहरा था कि घटना के तुरंत बाद गांव के लगभग सभी पुरुष अपने घर छोड़कर पश्चिम बंगाल भाग गए। अब गांव में सिर्फ महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बचे हैं। सड़कों पर खामोशी पसरी हुई है, लोग बातचीत से भी परहेज़ कर रहे हैं।
तैनात किये गये अतिरिक्त पुलिस बल
एसडीपीओ दयानंद आजाद ने बताया कि दोनों पक्ष एक ही समुदाय से हैं। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस फरार लोगों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
पुराने लफड़े ने ली खतरनाक करवट, फिर ताबड़तोड़ बमबाजी से दहला पाकुड़ का देवतल्ला गांव, क्या बता गये SDPO दयानंद आजाद… देखें pic.twitter.com/aui4PthuN7
— News Samvad (@newssamvaad) September 24, 2025
खामोशियों के बीच डर
देवतल्ला गांव इस समय खामोश है, लेकिन यह खामोशी डर और दहशत से भरी है। महिलाएं बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने देतीं। गांव की गलियों में सन्नाटा है, मानो बम धमाकों की आवाज़ अब भी गूंज रही हो।
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