अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : खनन क्षेत्र में धूल-धुएं और डीजल इंजनों की गड़गड़ाहट के बीच अब एक नई उम्मीद की आहट सुनाई देने लगी है। यह उम्मीद है हरित ऊर्जा की। अदाणी एंटरप्राइज़ेज लिमिटेड को अपने पहले हाइड्रोजन ट्रक की पहल के लिए ‘जूरी चॉइस लीडरशिप इन क्लाइमेट एक्शन अवॉर्ड’ से नवाजा गया है। बुधवार को दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में जब मंच से अदाणी को यह सम्मान मिला, तो यह सिर्फ एक कंपनी की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि उस भारत का सपना था जो साफ हवा और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है।
जब खदान से निकला ‘हरित’ ट्रक
मई की एक तपती दोपहर को रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जब इस ट्रक को हरी झंडी दिखाई थी, तो खदान मजदूरों और अधिकारियों के चेहरों पर कौतूहल और गर्व दोनों साफ झलक रहा था। यह कोई साधारण ट्रक नहीं था। तीन हाइड्रोजन टैंकों से लैस यह ट्रक 40 टन माल को 200 किलोमीटर तक ढो सकता है, और सबसे बड़ी बात… यह धुआं नहीं छोड़ता। खनन क्षेत्र में काम करने वालों के लिए यह बदलाव सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि सांस लेने के लिए थोड़ी साफ हवा और काम करने के लिए एक शांत माहौल भी है।

जूरी की नजर में क्यों खास है यह पहल
अवार्ड की जूरी ने साफ कहा कि यह पहल “सिर्फ तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है।” उन्होंने अदाणी की ऊर्जा दक्षता और ग्रीन लॉजिस्टिक्स में योगदान को सराहा। कंपनी के एक अधिकारी ने मंच से कहा… हमारा लक्ष्य सिर्फ खनन करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित रखना है।

बदलाव की और भी कोशिशें
अदाणी सिर्फ हाइड्रोजन ट्रक तक नहीं रुका। कंपनी ने खनन में ऑटोनॉमस डोजर पुश टेक्नोलॉजी, सोलर पावर, ट्री ट्रांसप्लांटर और डिजिटल इनिशिएटिव्स को भी अपनाना शुरू कर दिया है। इसका मकसद है कम से कम नुकसान, ज़्यादा से ज़्यादा स्थिरता। खनन क्षेत्रों में काम करने वाले लोग बताते हैं कि अब पिट के किनारे नई पौधारोपण योजनाएं चल रही हैं और मशीनें पहले से कहीं ज़्यादा शांति से काम कर रही हैं।
भविष्य की तस्वीर
अदाणी एंटरप्राइज़ेज की योजना है कि आने वाले समय में और हाइड्रोजन ट्रक शामिल किए जाएं। यह कदम भारत को पारंपरिक ईंधनों की बेड़ियों से निकालकर स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा।

इसे भी पढ़ें : ‘उम्मीदों’ का मेला, युवाओं के सपनों को अदाणी फाउंडेशन का सहारा

