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Home » 48 केस, 8 जिले, एक नाम… मयंक सिंह… अब हाई सिक्योरिटी जेल में होगा शिफ्ट
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48 केस, 8 जिले, एक नाम… मयंक सिंह… अब हाई सिक्योरिटी जेल में होगा शिफ्ट

October 11, 2025No Comments4 Mins Read
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मयंक सिंह
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Ranchi : वो अपराधी जिसने कभी विदेश में बैठकर झारखंड में दहशत का कारोबार चलाया, अब उसी झारखंड की जेल में अपने अगले अध्याय की शुरुआत करने जा रहा है। नाम है… मयंक सिंह उर्फ सुनील मीणा, जो कभी खुद को “इंटरनेशनल ऑपरेटर” कहता था। अजरबैजान से प्रत्यर्पित यह अपराधी अब जल्द ही जमशेदपुर के घाघीडीह सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया जाएगा। जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मयंक सिंह को रामगढ़ जेल में रखना सुरक्षा दृष्टि से जोखिमभरा है। उसे घाघीडीह भेजने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

अजरबैजान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था मयंक सिंह

कुख्यात सुनील मीणा को अजरबैजान से प्रत्यर्पित कर वापस झारखंड लाना झारखंड पुलिस की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। अजरबैजान की राजधानी बाकू से गिरफ्तार कर भारत लाया गया मयंक सिंह उर्फ सुनील मीणा, झारखंड का पहला ऐसा अपराधी है जिसे विदेश से प्रत्यर्पित किया गया। राजस्थान का रहने वाला मयंक, झारखंड के आपराधिक नेटवर्क में एक बड़ा नाम बन चुका था… खासकर अमन साव गैंग और लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क के बीच ‘सेतु’ के रूप में। वह मलेशिया में बैठकर झारखंड और बिहार के व्यापारियों को इंटरनेट कॉल से धमकी देता था। उसका गैंग सोशल मीडिया पर खुलेआम अपनी ताकत दिखाता था।

एटीएस की कड़ी मेहनत से उजागर हुई पहचान

झारखंड पुलिस को कई सालों तक यह तक पता नहीं था कि “मयंक सिंह” नाम का अपराधी असल में कौन है। एटीएस यानी एंटी टेररिज्म स्क्वॉड ने महीनों की जांच के बाद खुलासा किया कि असली नाम सुनील मीणा है और वह राजस्थान का रहने वाला है। इस खुलासे के बाद उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया, पासपोर्ट रद्द हुआ और अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की गई। आखिरकार पिछले साल अजरबैजान पुलिस ने उसे पकड़ा और इस साल झारखंड पुलिस की टीम उसे भारत लेकर आई।

रामगढ़ से घाघीडीह तक का सफर

फिलहाल मयंक सिंह रामगढ़ जेल में बंद है। लेकिन वहां की सुरक्षा व्यवस्था “हाई-प्रोफाइल कैदी” के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
इसी वजह से अब उसे अति-सुरक्षित घाघीडीह सेंट्रल जेल, जमशेदपुर भेजा जा रहा है। यह वही जेल है जहां राज्य के सबसे खतरनाक और हाई-रिस्क कैदियों को रखा जाता है।

48 केस, 8 जिले, एक नाम… मयंक सिंह

झारखंड पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक मयंक के खिलाफ 48 मुकदमे दर्ज हैं। सबसे ज्यादा केस हजारीबाग जिले में हैं। ये केस बड़कागांव, केरेडारी, कोर्रा, सदर थाने तक फैले हुए। इसके अलावा रांची, रामगढ़, पलामू और गिरिडीह में भी उसके नाम पर कई केस दर्ज हैं। इनमें ज्यादातर मामले धमकी, रंगदारी और फिरौती (धारा 385/387) से जुड़े हैं।

लॉरेंस और अमन साव के बीच की ‘लिंक चेन’

क्राइम वर्ल्ड में लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव जैसे नाम किसी परिचय के मोहताज नहीं। लेकिन इन दोनों के बीच जो कड़ी बनी, उसका नाम था मयंक सिंह। अमन साव (अब मृत) झारखंड में नेटवर्क संभालता था जबकि मयंक विदेश में बैठकर लॉरेंस के संपर्क में रहता था।
दोनों मिलकर कई राज्यों में फिरौती का रैकेट चला रहे थे।

अपराध के ग्लोबल नेटवर्क को ATS ने किया था ध्वस्त

मलेशिया से अजरबैजान तक — मयंक ने खुद को “अंतरराष्ट्रीय अपराधी” के रूप में स्थापित करने की कोशिश की। वह सोशल मीडिया पर अपने गैंग के लिए प्रचार करता था, वीडियो अपलोड करता था और ‘डर का ब्रांड’ बनाने में जुटा था। लेकिन झारखंड एटीएस ने उसका यह नेटवर्क ध्वस्त कर उसे वहीं ला दिया, जहां से सब शुरू हुआ था… जेल की सलाखों के पीछे।

फिरौती का धंधा और डिजिटल दहशत

मयंक का स्टाइल पुराने गैंगस्टरों से अलग था। वह डिजिटल दुनिया में सक्रिय था, कॉलिंग ऐप्स और फर्जी अकाउंट से धमकी भरे संदेश भेजता था। पुलिस के अनुसार वह लॉरेंस के इशारे पर फिरौती के लिए इंटरनेट कॉल करता था और कभी खुद को मलेशिया में बताता, कभी दुबई में।

अंततः सलाखों के पीछे

अब झारखंड पुलिस ने उसकी पूरी डिजिटल संपत्ति, बैंक लिंक और फर्जी अकाउंट की जांच शुरू कर दी है। घाघीडीह जेल में उसकी निगरानी के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी और शिफ्टिंग से झारखंड में चल रहे अमन साव–लॉरेंस नेटवर्क पर बड़ी चोट लगी है।

इसे भी पढ़ें : मौ’त का पहिया : पत्थर लदे हाइवा ने बरपाया कहर… जानें कैसे

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