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Ranchi : स्कूल के क्लासरूम में अक्सर गणित और विज्ञान के फॉर्मूले गूंजते हैं, लेकिन गुरुवार को डोरंडा स्थित डीपीएस स्कूल का माहौल कुछ अलग था। यहां बच्चों को जिंदगी की सबसे जरूरी सीख दी जा रही थी कि वे अपनी सुरक्षा कैसे करें और संकट के समय कानून उनके साथ किस तरह खड़ा होता है। डालसा यानी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची की पहल पर सजे ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के इस मंच से बच्चों के मन से कानूनी झिझक मिटाने की कोशिश की गई। यह पूरा अभियान झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सह कार्यपालक अध्यक्ष (झालसा) सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश, झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना और रांची के न्यायायुक्त सह डालसा अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा है।
डालसा सचिव राकेश रौशन ने समझाए पॉक्सो कानून के मायने
कार्यक्रम के केंद्र में रहे डालसा सचिव राकेश रौशन, जिन्होंने बेहद संजीदगी और अपनेपन के साथ बच्चों से सीधा संवाद साधा। राकेश रौशन ने साफ शब्दों में कहा कि सुरक्षित बचपन किसी पर अहसान नहीं, बल्कि हर एक बच्चे का बुनियादी अधिकार है। उन्होंने पॉक्सो एक्ट 2012 की बारीकियों को बेहद सरल जुबान में समझाते हुए बताया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को हर तरह के यौन शोषण, गलत हरकतों और अश्लील गतिविधियों से बचाने के लिए यह मजबूत कानून बनाया गया है।
डालसा सचिव राकेश रौशन ने इस बात पर खास जोर दिया कि पॉक्सो सिर्फ सजा तय करने की किताब नहीं है, बल्कि यह पीड़ित बच्चे को मानसिक तनाव से बचाने का सुरक्षा कवच भी है। कानून की जांच और अदालती प्रक्रिया को पूरी तरह बच्चों के अनुकूल बनाया गया है ताकि किसी भी पीड़ित को डर या सामाजिक झिझक का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि डालसा की टीम केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि नुक्कड़ नाटकों और जागरूकता अभियानों के जरिए शहर के अलग-अलग स्कूलों और कॉलेजों में जाकर नई पीढ़ी को उनके हकों के प्रति लगातार सजग कर रही है।
अभिभावकों के साथ दोस्ती और अच्छे-बुरे स्पर्श की पहचान
इस संवाद को आगे बढ़ाते हुए डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने घर-परिवार के माहौल पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक मजबूत समाज की नींव तभी पड़ती है जब बच्चों का बचपन डर से मुक्त हो। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के साथ ऐसा दोस्ताना रिश्ता बनाएं जिससे बच्चे किसी भी बात को छुपाने के बजाय खुलकर साझा कर सकें। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि अच्छा स्पर्श क्या है और कौन सा स्पर्श उन्हें असहज करता है। वहीं लाइफ सेवर एनजीओ के प्रमुख अतुल गेरा ने इस मुहिम को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि सिर्फ कानून के भरोसे बच्चों की सुरक्षा मुमकिन नहीं है, समाज के हर व्यक्ति को अपनी आंख और कान खुले रखने होंगे।
संकट में काम आएंगे ये जरूरी हेल्पलाइन नंबर
सत्र के दौरान बच्चों को यह भी सिखाया गया कि यदि कभी कोई मुश्किल सामने आ जाए, तो तुरंत किन नंबरों पर संपर्क करना चाहिए। बच्चों को राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन नंबर 15100, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 की पूरी जानकारी दी गई। इस जागरूकता अभियान के दौरान डालसा सचिव राकेश रौशन और डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा के साथ लाइफ सेवर एनजीओ के अतुल गेरा, पीएलवी गणेश कुमार, अमित बड़ाईक, दिपेन्द्र कुमार, प्रदीप नाग, नमिता देवी के अलावा स्कूल के शिक्षक और बड़ी तादाद में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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