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Latehar : लातेहार के परसाही गांव के पास डगडगी पुल उस रात शांत था, लेकिन हवा में हलचल थी। गांव के लोगों ने हौले से सुना, कोई धीमी आवाज़ों में बात कर रहा है। बाद में पता चला, वो राहुल दुबे गैंग के शातिर सदस्य थे, जो किसी बड़ी वारदात की साजिश रच रहे थे। इलके बाद रात करीब दस बजे लातेहार एसपी कुमार गौरव को गुप्त सूचना मिली… “गैंग के लोग पुल के पास जुटे हैं, किसी धमाके की योजना बन रही है।” बिना वक्त गंवाए एसपी ने डीएसपी अरविंद के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की। घने अंधेरे में पुलिस की गाड़ियां बिना सायरन के निकलीं। हर कदम सोच-समझकर बढ़ाया गया।
पकड़े गए गैंगस्टर के दो शातिर गुर्गे
जैसे ही पुलिस ने घेरा, दो लोग भागने की कोशिश करने लगे। पर उनकी कोशिश नाकाम हो गयी। अवधेश यादव और उपेंद्र यादव नाम के ये अपराधी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। उनके पास से एक 8 एमएम की देशी पिस्टल, जिंदा गोलियां, दो सुतली बम और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए।
टोरी साइडिंग की गोलीबारी से जुड़े तार
छानबीन में खुलासा हुआ कि ये वही अपराधी हैं, जिन्होंने कुछ दिन पहले टोरी कोयला साइडिंग में गोलीबारी की थी। उस वारदात में एनटीपीसी के एक कर्मी को गोली लगी थी। गैंग का तीसरा सदस्य, साजना अंसारी उर्फ संजू, अब भी फरार है और पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
अपराध की जड़ तक पहुंचने की जंग
लातेहार पुलिस के लिए यह सिर्फ दो गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे गैंग नेटवर्क तक पहुंचने की कड़ी है। एसपी कुमार गौरव का कहना है कि “हम केवल अपराधी नहीं पकड़ रहे, बल्कि उस सोच को खत्म करना चाहते हैं जो झारखंड को बंदूक और बम से डराने की कोशिश करती है।”
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