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Pakur (Jaydev Kumar) : 12 अक्टूबर 2025 का दिन पाकुड़ में सूचना अधिकार के समर्थकों के लिए यादगार बन गया। भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच, पाकुड़ ज़िला संगठन के नेतृत्व में स्थानीय एक्टिविस्टों ने सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर परिचर्चा और केक काटकर जश्न मनाया। कार्यक्रम में ज़िला अध्यक्ष अमित कुमार दास ने कहा कि यह अधिनियम आम नागरिकों के लिए “कलम युक्त हथियार” की तरह है, लेकिन राज्य में सूचना आयुक्त की बहाली में लगातार देरी ने इसे कई बार केवल कागजों तक सीमित कर दिया।
“एक अधिनियम नहीं, एक अधिकार”
ज़िला सचिव सुरेश अग्रवाल ने भावुक अंदाज़ में कहा कि अधिनियम के बीस वर्षों में जनता ने अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई, लेकिन सुचना आयोग की बहाली नहीं होने से कानून अपने पूर्ण स्वरूप में काम नहीं कर पाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया, “जब विपक्ष नहीं था तो बहाली में देरी थी, अब जब विपक्ष है, फिर क्यों नहीं?”
सदस्यों ने साझा की अनुभूतियां
ज़िला उपाध्यक्ष मो अहसान आलम, संगठन सचिव माइकल मरांडी, मंत्री संतोष किसपोट्टा और अन्य सदस्य अपने अनुभव साझा करते हुए यह महसूस करवा रहे थे कि सूचना का अधिकार केवल कागज़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए। मंच पर सभी ने कहा कि ग्रामीण और शोषित समुदायों तक उनके अधिकार पहुँचाना अब हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आगे की योजना : जागरूकता रथ
अमित कुमार दास ने बताया कि 18 अक्टूबर से आरटीआई जागरूकता रथ गांव-गांव में घूमेगा और ग्रामीणों को उनके हक़ के बारे में जानकारी देगा। यह रथ न केवल जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि लोगों में अपने अधिकारों के प्रति आत्मविश्वास भी जगाएगा। कार्यक्रम ने दर्शाया कि सूचना अधिकार केवल क़ानून नहीं, बल्कि आम जनता के लिए एक शक्ति है। बीस सालों के संघर्ष और अनुभव के बाद अब यह मंच पूरे जोश और उत्साह के साथ ग्रामीणों तक अपने संदेश को पहुंचाने के लिए तैयार है।
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