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Ranchi : रांची की हवा में शुक्रवार की शाम कुछ अलग सी चमक थी। परेड ग्राउंड की ओर जाते हर चेहरे पर मुस्कान और आंखों में दीयों की सी चमक थी। इप्सोवा के 25वें स्थापना वर्ष पर आयोजित दीवाली मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि शहर के दिल की धड़कन बन गया था… जहां संस्कृति, संगीत, बच्चों की हंसी और परंपरा का सुंदर संगम एक साथ जीवंत हुआ।
बच्चों की मासूमियत और रचनात्मकता ने जीता दिल
मेले की शुरुआत स्कूली बच्चों की प्रतियोगिता से हुई… जहां डीपीएस, लोरेटो, जेवीएम, डीएवी हेहल जैसे स्कूलों के बच्चे मंच पर उतरे।
उनके रंगीन परिधानों, आत्मविश्वास और मुस्कराहट ने हर किसी को मोहित कर लिया। एक तरफ मंच पर बच्चों की कविताएं गूंज रही थीं, तो दूसरी ओर दर्शक दीर्घा में बैठे अभिभावकों की आंखों में गर्व और खुशी के भाव थे।

लोक नृत्य, संगीत और संस्कृति का जादू
जब मंच पर राजस्थानी और काबेलिया लोक नृत्य शुरू हुआ, तो पूरे मैदान में जैसे रेगिस्तान की रेत और लोकगीतों की गूंज भर गई।
रंग-बिरंगे घाघरे, लहराते दुपट्टे और ढोलक की थाप पर थिरकती कलाकारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत की हर लय के साथ माहौल में त्योहार की ऊर्जा घुल गई। सांस्कृतिक स्टॉल्स पर लाइव पॉटरी मेकिंग और सोहराय पेंटिंग होती देख बच्चों की भीड़ उमड़ पड़ी। एक तरफ कलाकार अपने हाथों से मिट्टी को आकार दे रहे थे, तो दूसरी ओर बच्चे मिट्टी की खुशबू में अपने बचपन की जिज्ञासा ढूंढ रहे थे।

तकनीक और परंपरा का अनोखा संगम
इप्सोवा मेला सिर्फ कला और संस्कृति तक सीमित नहीं था। पुलिस मॉडर्नाइजेशन स्टॉल्स में अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद और लैंड माइन वाहन देख लोगों में रोमांच देखने लायक था। बच्चे विशेष तौर पर एयरो मॉडलिंग और आर्चरी जोन में जुटे थे… जहां छोटे-छोटे हाथ हवा में विमान उड़ाने की कोशिश कर रहे थे और लक्ष्य पर तीर चलाने का अभ्यास कर रहे थे।

जब विशाल जैन के गीतों पर झूम उठी राजधानी
शाम ढल चुकी थी, आसमान में दीये टिमटिमा रहे थे और मंच पर आए मशहूर गायक विशाल जैन ने अपनी जादुई आवाज़ से पूरा माहौल रोशन कर दिया। उनके मुख से निकले गीत पर दर्शक खूब झूमने लगे। संगीत, मुस्कान और उत्सव की यह शाम हर किसी के दिल में बस गई।
महिलाओं की रचनात्मकता और संगठन की ताकत
इस पूरे आयोजन के पीछे इप्सोवा की टीम की मेहनत झलक रही थी। अध्यक्ष शिखा गुप्ता, सचिव नेहा सागर, कोषाध्यक्ष प्रिया दुबे और सदस्य पूजा झा, प्रीति होमकर, चीनू कुमार, प्रीति रमेश एवं प्रिया रंजन… सभी ने मिलकर इस मेले को एक परिवार की तरह सजाया था। शिखा गुप्ता ने मुस्कराते हुए कहा, “हमारा मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि बच्चों को मंच देना और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।”

संस्कृति, कला और भावनाओं का उत्सव
इप्सोवा का यह दीवाली मेला सिर्फ रोशनी और सजावट तक सीमित नहीं रहा। यह उस “मानवीय जुड़ाव” का उत्सव बन गया जिसमें हर कोई शामिल था। कहीं बच्चों की हंसी थी, कहीं कलाकारों की मेहनत, और कहीं माताओं की आंखों में गर्व की चमक।

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