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Bokaro : सोमवार की शाम बोकारो जिले के चास थाना क्षेत्र के आदर्श कॉलोनी स्थित गायघाट में अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। कुछ ही मिनटों में सन्नाटा छा गया, और लोगों को यह समझने में देर नहीं लगी कि कुछ अनहोनी हो चुकी है। उसी सन्नाटे के बीच जमीन पर पड़ा था एक जवान — अजय यादव उर्फ सोनू (28 वर्ष), जिसकी सांसें अब थम चुकी थीं।
छठ की छुट्टी, घर में खुशी और अचानक मातम
अजय यादव, इंडिया रिजर्व बटालियन (आईआरबी) में तैनात था और इन दिनों गिरिडीह में उसकी पोस्टिंग थी। छठ पर्व की छुट्टी पर वह अपने घर आया था। घर में त्यौहार की तैयारी चल रही थी। मां प्रसाद की साज-सज्जा में लगी थीं, पिता लक्ष्मी नारायण यादव समाज सेवा के काम से लौटे ही थे। लेकिन किसे पता था कि यह घर, जो सुबह तक हंसी से भरा था, रात तक मातम में डूब जाएगा।
एक मामूली बहस… और तीन गोलियां
रात करीब आठ से नौ बजे के बीच का वक्त था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अजय की किसी बात पर बलराम तिवारी नामक युवक से बहस हो गई। बात इतनी नहीं बढ़नी चाहिए थी, पर कुछ ही देर में बलराम अपने दो-तीन साथियों के साथ गायघाट स्थित शिव मंदिर के पास पहुंचा, जहां अजय अपने दोस्तों के साथ खड़ा था। कहते हैं, बलराम ने पहले गालियां दीं, फिर जेब से पिस्टल निकाली। और फिर — तीन गोलियां दाग दीं। तीन गोलियां… सीधे अजय के पेट में लगीं। आवाज़ गूंजी, और पूरा इलाका सहम गया।
“बचाओ” की आवाज़, लेकिन देर हो चुकी थी
लोग दौड़े, दोस्तों ने घायल अजय को उठाया, मोटरसाइकिल और ऑटो से उसे बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने कहा — “आने से पहले ही दम तोड़ चुका है।” घर में यह खबर पहुंची तो मां बेहोश हो गईं, पिता के आंसू थम नहीं रहे थे। मोहल्ले में बस एक ही सवाल था… “एक बहस के लिए किसी की जान कैसे ले ली?”
बलराम तिवारी पहले भी रह चुका है सुर्खियों में
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी बलराम तिवारी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उस पर पहले भी कई मामले दर्ज हैं, जिनमें पुलिस जवान पर हमला करने का भी आरोप शामिल है। घटना के बाद से वह और उसके साथी फरार हैं। पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश में छापेमारी जारी है।
इलाके में तनाव, लेकिन सवाल अब भी बाकी हैं
हत्या की खबर फैलते ही गायघाट और चास क्षेत्र में तनाव फैल गया। सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए, आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करने लगे। भीड़ ने शव के साथ सड़क जाम किया। पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। परिवार में मातम है, पर सवाल अब भी हवा में तैर रहा है… क्या झारखंड की सड़कों पर अब बहस का मतलब मौत है? क्या कानून से डर खत्म हो गया है?
सोनू बहुत सीधा था, किसी से झगड़ा नहीं करता था : पड़ोसी
पड़ोसी बताते हैं, अजय बचपन से ही मिलनसार और शांत स्वभाव का था। वह हमेशा पुलिस सेवा में ईमानदारी से काम करता था। एक पड़ोसी ने नम आंखों से कहा… छुट्टी में आया था, कहा था… मां छठ के बाद लौट जाऊंगा। पर अब वह लौटेगा नहीं, उसकी वर्दी, उसका बैज, और उसकी ड्यूटी… सब अब यादें बन गई हैं।
पिता की मांग – न्याय चाहिए, बस न्याय
समाजसेवी पिता लक्ष्मी नारायण यादव की आंखों में आंसू हैं, लेकिन आवाज में दर्द के साथ दृढ़ता भी… “मेरे बेटे ने देश के लिए वर्दी पहनी थी, अब राज्य को उसके लिए इंसाफ दिलाना होगा।”
आरोपी को दबोचने में जुटी पुलिस
पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है। मुख्य आरोपी बलराम तिवारी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। लेकिन गायघाट के लोग अब भी उस रात की आवाज़ को भूल नहीं पा रहे… वो तीन गोलियां, जिन्होंने एक जवान की जिंदगी छीन ली और एक पूरे मोहल्ले का सुकून भी।
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