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Chaibasa : हो समाज में किली (गोत्र) सिर्फ एक पारिवारिक पहचान नहीं, बल्कि पवित्र वंश परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। इस कड़ी मर्यादा के भीतर अगर कोई सीमा लांघे, तो उसका परिणाम समाज के बहिष्कार तक पहुंच जाता है। इसी परंपरा की गूंज हाल ही में पश्चिमी सिंहभूम जिले के दो गांवों… लखीपाई और पदमपुर में सुनाई दी, जहां प्रेम और परंपरा की जंग ने पूरे इलाके को हिला दिया।
लखीपाई का युवक और पदमपुर की युवती…
जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के लखीपाई गांव के एक युवक और टोंटो थाना क्षेत्र की पदमपुर गांव की एक युवती के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध था। दोनों लागुरी किली से आते हैं… यानी एक ही गोत्र से। परंपरा के अनुसार ऐसा विवाह समाज में पाप माना जाता है। जब युवती गर्भवती हुई, तब यह गुप्त विवाह उजागर हो गया। दोनों गांवों में चर्चा फैल गई, और देखते ही देखते यह मामला समाज के वरिष्ठों तक पहुंच गया।
गांव में सजी परंपरागत अदालत… समाज ने सुनाया कठोर फैसला
मंगलवार को लखीपाई गांव में मानकी-मुण्डा, दियुरी और ‘हो समाज युवा महासभा’ के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में विशेष बैठक बुलाई गई। बैठक में दोनों परिवारों ने अपने बच्चों की गलती स्वीकार की और समाज से क्षमा मांगी। लेकिन ‘हो’ समाज की परंपरा सख्त है। सर्वसम्मति से निर्णय हुआ… प्रेमी जोड़े को समाज और गांव से आजीवन बहिष्कृत किया जाए।
शुद्धिकरण अनुष्ठान और बोंगा-बुरु की अराधना
समाज की मर्यादा पुनः स्थापित करने के लिए गांव में शुद्धिकरण अनुष्ठान हुआ। बोंगा-बुरु (स्थानीय देवी-देवता) की पूजा के साथ मुर्गा और बकरी की बलि दी गई। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से समाज से क्षमा मांगी। अनुष्ठान के दौरान दोनों परिवारों ने मुंडन कर लिया… यह समाज की परंपरागत सजा का हिस्सा है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह गलती फिर कभी नहीं दोहराई जाएगी।

फरार प्रेमी जोड़ा और समाज की चिंता
इस बीच खबर आई कि युवक और युवती बैठक से पहले ही गांव छोड़कर फरार हो गए। समाज के लोगों को यह चिंता सता रही है कि आधुनिकता के दौर में युवाओं में परंपरा की समझ और सम्मान तेजी से कम होता जा रहा है। ‘हो समाज युवा महासभा’ के राष्ट्रीय महासचिव गब्बर सिंह हेम्ब्रम ने कहा… “ऐसे मामलों से समाज की छवि धूमिल होती है। हमें अपने युवाओं को जागरूक करना होगा ताकि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बना रहे।”
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