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Godda : सुंदरपहाड़ी प्रखंड के जीतपुर इलाके के दाहूबेड़ा और पकेड़ी गांव के युवाओं के चेहरे पर लंबे समय बाद उम्मीद की झलक दिखी। वजह है टेरी माइनिंग कंपनी और श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग की ओर से आयोजित रोजगार मेला। सोमवार की सुबह जब गांव के चौपाल पर बैनर लगा और कंपनी के प्रतिनिधि पहुंचे, तो ग्रामीणों के बीच उत्साह देखने लायक था। कोई अपने पुराने बायोडेटा को संभाल रहा था तो कोई अपने कपड़ों की सलवटें ठीक कर रहा था। तीन गांवों से आए 46 युवाओं के मन में एक ही सवाल था… क्या आज उनके हाथ रोजगार की चाबी लगेगी?
सिर्फ नौकरी नहीं, आत्मनिर्भर बनने की राह
यह मेला सिर्फ एक नौकरी पाने का मौका नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में पहला कदम था। गांव के एक शख्स ने कहा कि हम जैसे लोगों के लिए शहर जाना मुश्किल होता है। अगर यही पर काम मिले तो हमारे परिवार का भविष्य सुरक्षित रहेगा। टेरी माइनिंग कंपनी के अधिकारियों ने युवाओं से बातचीत कर उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसरों की जानकारी दी और इच्छुक प्रतिभागियों से बायोडेटा लिया।

कंपनी और प्रशासन की साझा कोशिश
कार्यक्रम में टेरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी सदानन्द सिंह, संतोष कुमार, सुषमा सोरेन, राजू सिंह, सरबजीत कौर और जितेन्द्र कुमार मौजूद रहे। परियोजना प्रमुख रितेश तिवारी ने बताया कि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देना हमारा मकसद है। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि गांवों का आर्थिक विकास भी होगा।
ग्रामीणों में फिर लौटी उम्मीद की किरण
पकेड़ी गांव की एक महिला ने मुस्कुराते हुए हौले से कहा कि पहली बार लगा कि हमारी भी सुनने वाला कोई है। ऐसे कई चेहरे थे, जिनकी आंखों में अब भविष्य की चिंता नहीं बल्कि उम्मीद की चमक थी। जीतपुर खनन परियोजना अब सिर्फ कोयला निकालने की कहानी नहीं रही, यह गांव के युवाओं के सपनों को नया आकार देने वाली पहल बन गई है।

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