अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : रविवार की देर रात, जब ज्यादातर लोग अपने घरों में चैन की नींद सो रहे थे, राजधानी रांची की सड़कों पर एक पुलिस अधिकारी शहर की धड़कन टटोल रहा था। वो थे SSP राकेश रंजन। बिना किसी पूर्व सूचना या सुरक्षा तामझाम के वे अचानक बिरसा चौक से लेकर मेन रोड, हरमू, अरगोड़ा और बायपास रोड तक निकल पड़े। उनके साथ न कोई मीडिया थी, न कैमरे की फ्लैश। था तो बस सिर्फ एक जिम्मेदारी का एहसास, शहर चैन की नींद सोए।
रात का सन्नाटा और रांची पुलिस कप्तान की चौकसी
रात के करीब 12 बजे के बाद शहर की सड़कें लगभग खाली थीं। ठंडी हवा चल रही थी और सड़क किनारे कुछ जगहों पर पुलिसकर्मी चौकसी में जुटे थे। तभी अचानक एसएसपी की गाड़ी उन इलाकों में पहुंची। कई जवानों को पहले तो यकीन नहीं हुआ कि एसएसपी खुद सामने खड़े हैं। SSP राकेश रंजन ने उनसे पूछा- “सब ठीक चल रहा है न? गश्त सही से हो रही है?” उन्होंने पुलिसकर्मियों को समझाया कि एक छोटी सी चूक कभी-कभी बड़ी घटना का रूप ले सकती है।
दो थानेदारों से मांगा स्पष्टीकरण
निरीक्षण के दौरान जब कुछ जगहों पर गश्ती की कमी और लापरवाही दिखी, तो एसएसपी ने नाराजगी जताई। उन्होंने ओरमांझी और पिठोरिया थानेदारों को शोकॉज कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा। SSP राकेश रंजन ने कहा कि शहर की सुरक्षा कोई औपचारिकता नहीं है। अगर कोई लापरवाह है, तो उसे जिम्मेदारी निभाने का हक नहीं।
कानून सबके लिए बराबर है : एसएसपी
SSP राकेश रंजन ने अपने निरीक्षण के दौरान यह भी साफ किया कि अपराधी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो या किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण क्यों न मिले, पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा काम लोगों को भरोसा देना है कि रांची सुरक्षित है। डर सिर्फ अपराधियों को होना चाहिए। उनका कहना है कि पुलिस की असली ताकत जनता का विश्वास है। जिम्मेदारी वही निभा सकता है जो लोगों की सुरक्षा को अपनी नींद से ऊपर रखे। ऐसे अचानक दौरे अब नियमित रूप से होते रहेंगे।
इसे भी पढ़ें : राजधानी में कई थानेदार इधर से उधर… देखें लिस्ट

