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Chaibasa : रात करीब 12 बजे का वक्त था। बड़ाजामदा का इलाका नींद में डूबा हुआ था। तभी कुछ नकाबपोश लोग चुपचाप फुटबॉल मैदान के पास वाले रास्ते से होकर अनिल चौरसिया के घर की ओर बढ़े। दरवाजा खुला और कुछ ही मिनटों में घर के अंदर सन्नाटा और डर फैल गया। हथियारबंद अपराधियों ने पिस्टल दिखाते हुए घरवालों को कोने में बैठा दिया और नकद, गहने, ब्रेसलेट सब लेकर निकल गए। मामले को लेकर पुलिस कप्तान अमित रेणु ने चाईबासा एसडीपीओ अजय केरकेट्टा की देखरेख में SIT गठित की। SDPO ने अपनी टीम के साथ लगातार छापेमारी शुरू की, सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, मोबाइल लोकेशन ट्रेस की गई और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं। करीब तीन हफ्तों की मेहनत के बाद पुलिस को सफलता मिली। पांच अपराधी… संजीव मिश्रा, राज कुमार बैश्रों, पिंटू कुमार बारीक, दीपक महतो और रामाशंकर गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से बीस हजार रुपये नकद, दो कारें, एक पिस्टल, सात मोबाइल फोन और एक चाइनीज सीढ़ी बरामद हुई।
जमशेदपुर का कुख्यात निकला मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में सामने आया कि इस वारदात का मास्टरमाइंड जमशेदपुर का रहने वाला संजीव मिश्रा था। संजीव कोई नया खिलाड़ी नहीं था। उसके खिलाफ पहले से ही छह मामले दर्ज हैं। वह पहले जेल जा चुका है और पुलिस फाइलों में आदतन अपराधी के रूप में जाना जाता है। इस बार उसने नया तरीका अपनाया… छोटे कस्बे के लड़कों को साथ लेकर डकैती की प्लानिंग की, इलाके की रेकी की और रात के अंधेरे में वारदात को अंजाम दिया।

सराहनीय रही इनकी भूमिका
इस कांड को सुलझाने में एसडीपीओ अजय केरकेट्टा, बड़ाजामदा ओपी प्रभारी बालेश्वर उरांव, नोवामुंडी थानेदार नयन कुमार सिंह, गुवा थानेदार नितेश कुमार और तकनीकी शाखा के पुलिसकर्मियों की भूमिका सराहनीय रही।
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