अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : झारखंड पुलिस के इतिहास में शुक्रवार का दिन खास बन गया। राज्य को पहली बार एक महिला डीजीपी मिली हैं, नाम है तदाशा मिश्रा। नाम सुनते ही पुलिस महकमे में सख्त लेकिन संवेदनशील अफसर की छवि उभर आती है। वही अफसर, जिसने कभी नक्सलियों के गढ़ झुमरा पहाड़ में ऑपरेशन की कमान खुद संभाली थी, जब वहां जाना पुलिस बल के लिए भी डर का कारण था। आज वही अधिकारी राज्य पुलिस की कमान संभाल चुकी हैं। शुक्रवार सुबह रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में जब उन्होंने बतौर प्रभारी डीजीपी चार्ज लिया, तो माहौल में एक सादगी और गंभीरता थी। कैमरों की चमक के बीच उन्होंने बस इतना कहा… “झारखंड सरकार के विजन के तहत काम होगा, हमारा फोकस संगठित अपराध और नक्सलवाद के खात्मे पर रहेगा।”
झारखंड की पहली महिला DGP बनीं तदाशा मिश्रा, चार्ज लेते क्या बोल गयीं… देखें pic.twitter.com/RRwEtHNNHp
— News Samvad (@newssamvaad) November 7, 2025
सिटी एसपी से डीजीपी तक का सफर
तदाशा मिश्रा का सफर आसान नहीं रहा। वे उस दौर में पुलिस में आईं जब महिलाओं की भागीदारी बेहद कम थी। अविभाजित बिहार में रांची सिटी एसपी के रूप में उन्होंने शुरुआत की। धीरे-धीरे अपने काम से उन्होंने भरोसा जीता और जैप-1, जैप-2 कमांडेंट, बोकारो एसपी, गिरिडीह एसपी, डीआईजी कार्मिक, आईजी मानवाधिकार, आईजी स्पेशल ब्रांच जैसी जिम्मेदार भूमिकाएं निभाईं। हर पद पर उनका एक ही नजरिया रहा… “कानून सिर्फ किताबों का शब्द नहीं, आम आदमी की सुरक्षा का वादा है।”
जब नक्सलियों के बीच जाकर खुद संभाली कमान
बोकारो एसपी रहते तदाशा मिश्रा ने वो किया, जो कम ही अफसर करने की हिम्मत जुटा पाते हैं। उन्होंने झुमरा पहाड़ जैसे नक्सल प्रभावित इलाके में खुद मोर्चा संभाला। उस वक्त जवानों में डर था, लेकिन मिश्रा के नेतृत्व में वही डर साहस में बदल गया। उन्होंने इलाके में ऑपरेशन चलाया और पुलिस की पकड़ मजबूत की।
समझौते में यकीन नहीं रखतीं तदाशा मिश्रा
तदाशा मिश्रा को जानने वाले कहते हैं कि वे उतनी ही संवेदनशील हैं जितनी सख्त। अपराधियों से निपटने में जहां वे किसी समझौते में यकीन नहीं रखतीं, वहीं समाज के कमजोर तबके के लिए उनके भीतर गहरी संवेदना है। वे महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा पर हमेशा फोकस करती रही हैं।
चुनौतियों से नहीं हटतीं पीछे
डीजीपी बनने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती नक्सलवाद और संगठित अपराध से निपटना होगी। लेकिन उन्हें जानने वाले कहते हैं, तदाशा मिश्रा चुनौतियों से पीछे नहीं हटतीं… बल्कि उन्हें नेतृत्व का अवसर मानती हैं। राज्य की पहली महिला डीजीपी के रूप में उन्होंने न सिर्फ इतिहास रचा है, बल्कि आने वाली पीढ़ी की महिला अधिकारियों के लिए रास्ता भी खोला है।
इसे भी पढ़ें : तदाशा मिश्रा बनीं झारखंड की प्रभारी DGP… देखें अधिसूचना

