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Ranchi : सुबह की ठंडी हवा में जब रांची के मोरहाबादी मैदान से सैकड़ों कदम एक साथ आगे बढ़े, तो यह सिर्फ एक दौड़ नहीं थी। यह झारखंड के दिल की धड़कन थी। “रन फॉर झारखंड” कार्यक्रम ने राज्य स्थापना के 25वें गौरवशाली वर्ष को एक नए उत्साह और एकता के साथ जीने का मौका दिया। बापू वाटिका के आसपास मंगलवार की सुबह कुछ अलग थी। स्कूली बच्चे झंडे थामे खड़े थे, युवा ट्रैकसूट में तैयार, महिलाएं मुस्कान के साथ शामिल हो रही थीं। सीएम हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने भी उसी जोश में भाग लिया, जैसे हर आम नागरिक। जब सीएम ने झंडी दिखाई, तो “जय झारखंड” के नारों से पूरा मैदान गूंज उठा।
सीएम हेमंत बोले– यह दौड़ हमारी पहचान की है
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का यह 25वां वर्ष हमारे संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। यह दौड़ उन सभी महान आत्माओं को समर्पित है, जिन्होंने अपने बलिदान से इस राज्य को बनाया। उन्होंने आगे कहा कि “रन फॉर झारखंड” के जरिए एक संदेश दिया जा रहा है… राज्य तभी मजबूत होगा जब हम सब एकजुट रहेंगे। इस कार्यक्रम से झारखंड रजत जयंती और धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती समारोहों की शुरुआत हुई। सीएम ने कहा कि बिरसा मुंडा की सोच ही झारखंड की आत्मा है। आत्मसम्मान, अधिकार और एकता की भावना। इसी भावना को आज दौड़ते कदमों ने जीवंत कर दिया।

लोगों के चेहरों पर था गर्व और अपनापन
दौड़ में शामिल हुई 17 वर्षीय एक छात्रा ने कहा कि आज मुझे लगा कि मैं भी इस राज्य की कहानी का हिस्सा हूं।” वहीं हजारीबाग से आए खिलाड़ी ने बताया कि यह सिर्फ खेल नहीं, हमारी पहचान का उत्सव है। मैदान में मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर वही गर्व झलक रहा था, जो 25 साल पहले राज्य बनने के दिन था।

नेताओं और नागरिकों ने एक साथ लगायी दौड़
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, सांसद महुआ माजी, विधायक कल्पना सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार और अन्य अधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। लेकिन सबसे खास यह रहा कि मंच और मैदान के बीच कोई दूरी नहीं थी। नेता, खिलाड़ी, विद्यार्थी, प्रशासन और आम नागरिक, सब एक साथ दौड़ रहे थे।

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