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Khunti : खूंटी जिले के एक छोटे से गांव लांदुप नीचेटोली में 14 नवंबर की रात सब कुछ पहले की तरह ही शांत था। कच्चे घरों के बीच से आती हल्की हवा और दूर कहीं भौंकते कुत्ते, यही रोज का माहौल था। लेकिन उसी रात दो बूढ़े लोगों की सांसें अचानक थम गईं। कानू मुंडा और उनकी पत्नी गौरी देवी अब इस दुनिया में नहीं थे। गांव सुबह एक ऐसे सच के साथ जागा जिसने सबको अंदर तक हिला दिया। कानू मुंडा 66 साल के थे। गांव में सब उन्हें एक शांत और सरल आदमी के तौर पर जानते थे। गौरी देवी घर के कामों में लगी रहती थीं। उम्र तो बढ़ चुकी थी, लेकिन अपने ही ढंग से दोनों अपनी छोटी सी दुनिया चला रहे थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि ऐसी जिंदगी इतनी दर्दनाक तरीके से खत्म होगी।
गांव के ही दो बच्चों पर इल्जाम
जब पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया तो गांव अचंभे में पड़ गया। हत्यारे कोई बाहरी नहीं थे। गांव के ही दो युवा, कांडे मुंडा (25) और जयलाल मुंडा (19), जिन्हें लोग बचपन से जानते थे। पुलिस पूछताछ में दोनों ने माना कि गौरी देवी अक्सर उन्हें डांट देती थीं, गाली-गलौज करती और ताना भी मारती थीं। छोटी सी बात धीरे-धीरे उनको अंदर ही अंदर जलाती रही। गुस्से ने धीरे-धीरे जगह बनाई और एक दिन उन्होंने वही कर दिया जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी।
योजना बनाकर सोते हुए दंपति पर हमला
14 नवंबर की रात, जब गांव के घरों की लाइटें बुझ चुकी थीं, आरोपितों ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर दंपति के घर का दरवाजा खोला। कानू और गौरी देवी सो रहे थे। उस शांत नींद पर अचानक धारदार हथियारों की वार बरस पड़े। एक ही झटके में दो जानें खत्म हो गईं। बिना किसी शोर, बिना किसी संघर्ष के।
वारदात के बाद भी गांव में घूमते रहे आरोपी
हैरानी की बात यह है कि हत्या के बाद आरोपी कहीं भागे नहीं। अगले ही दिन वे उसी तरह गांव के रास्ते पर दिखे जैसे कुछ हुआ ही न हो। शायद यही सोचकर कि अगर वे सामान्य बने रहेंगे तो कोई शक नहीं करेगा। लेकिन पुलिस धीरे-धीरे सुराग जोड़ रही थी। तकनीकी जांच और गुप्त सूचना ने दिशा दिखाई।
टांगी और तोनो बरामद, दो अब भी फरार
जब पुलिस ने कांडे और जयलाल को हिरासत में लिया तो कहानी खुलने लगी। दोनों टूट गए और सब बता दिया। उनकी निशानदेही पर टांगी और तोनो भी बरामद हुए। दो साथी अभी भी फरार हैं, और पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
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