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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ की सुबह आज कुछ अलग थी। सदर अस्पताल के पुराने परिसर में हल्की धूप पड़ रही थी, और उसी रोशनी के बीच लोग शांत भाव से कतार में खड़े थे। किसी के चेहरे पर हल्की घबराहट, तो किसी पर मुस्कान। पर एक बात सबमें समान थी… वे किसी अनजान चेहरे की जिंदगी बचाने आए थे।
एक दिन, कई शिविर, एक ही भाव
प्रोजेक्ट जागृति के तहत आज जिले के हर प्रखंड में एक साथ रक्तदान शिविर लगाए गए। शहर से लेकर दूरस्थ क्षेत्रों तक, हिरणपुर, लिट्टीपाड़ा, अमड़ापाड़ा, महेशपुर और पाकुड़िया के स्वास्थ्य केंद्रों में लोग समय से पहले पहुंच गए थे। इनमें से कई लोग अपने काम से छुट्टी लेकर आए, कुछ पहली बार आए थे, जबकि कुछ अनुभवी रक्तदाता फिर से किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी भरने के लिए पहुंचे थे।
डीसी ने बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम की शुरुआत डीसी मनीष कुमार, सिविल सर्जन डॉ. सुरेन्द्र कुमार मिश्रा और बीवीडी पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार ने दीप जलाकर की। शिविर की भीड़ देखकर डीसी कुछ देर तक चुपचाप दाताओं को देखते रहे। फिर मुस्कुराते हुए कहा, “रक्तदान केवल सेवा नहीं, यह किसी को नया जीवन देने का अवसर है।” उन्होंने रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र और कॉफी मग देकर सम्मानित किया। सम्मान लेने वाले कई युवाओं की आँखों में गर्व साफ दिख रहा था।
77 लोग बने किसी की जिंदगी का सहारा
दिनभर चले शिविरों में जिला भर से कुल 77 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। इनमें सरकारी विभागों के कर्मचारी, कॉलेज छात्र, दुकानदार, शिक्षक और कई ग्रामीण शामिल रहे। कई दाताओं ने कहा कि वे किसी को जानते भी नहीं, जिसे उनका रक्त मिलेगा, लेकिन “इससे बेहतर खुशी क्या हो सकती है कि आपकी नसों का खून किसी की धड़कनों को बचा ले।”
हर महीने जीवन बचाने का अभियान
डीसी मनीष कुमार ने बताया कि प्रोजेक्ट जागृति के तहत हर महीने की 24 तारीख को रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। यह प्रयास इसलिए ताकि कोई मरीज अस्पताल में खून की कमी के कारण परेशान न हो। उन्होंने नागरिकों से अपील की, “स्वस्थ लोग नियमित रक्तदान करें। यह कुछ मिनटों का साहस, किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का आशीर्वाद बन सकता है।”
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