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Garhwa (Nityanand Dubey) : जिंदगी के आठ साल किसी पर भरोसा करके बिताना आसान नहीं होता, खासकर तब जब वह भरोसा एक दिन अचानक टूट जाए। श्रीबंशीधर नगर थाना क्षेत्र की एक युवती की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। प्रेम, भरोसा, इंतजार और फिर उसी भरोसे के खून का दर्द… उसने इन सबको चुपचाप सहा, लेकिन अब उसने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। युवती बताती है कि साल 2017 में उसकी मुलाकात प्रदीप कुमार पासवान से हुई। बातचीत शुरू हुई, फिर दोस्ती और धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के जीवन में जगह बनाने लगे। समय बीतने के साथ दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे। दोनों के बीच कई बार देह से देह का रिश्ता भी बना। युवती ने अपना भविष्य प्रदीप के साथ ही देखना शुरू कर दिया था। वह कहती है, “उसने कहा था कि नौकरी मिलते ही शादी कर लेगा। मैं उसकी बात पर यकीन करती रही।”
नौकरी के बाद बदल गया रिश्ता
साल 2023 में प्रदीप को BPSC से कंप्यूटर साइंस टीचर की नौकरी मिल गई। युवती को लगा कि अब उनका जीवन बेहतर हो जाएगा। लेकिन नौकरी के साथ ही प्रदीप का रवैया बदलने लगा। शादी की बात पर वह हर बार अलग बहाना देता। युवती बताती है, “नौकरी मिलने के बाद वह बदलने लगा। फोन पर बातें कम हो गईं। मुलाकातें भी कम हो गईं।”
फरवरी 2025 में प्रदीप के पास गयी बिहार
फरवरी 2025 में युवती प्रदीप से मिलने बिहार गई, जहां वह नौकरी कर रहा था। उम्मीद थी कि सब ठीक हो जाएगा। प्रदीप ने उसे अपने पास रखा, साथ समय बिताया, लेकिन इसी बीच प्रदीप की मां और बहन ने उसे ताने भी दिए। युवती ने इन्हें चुपचाप सहा, क्योंकि उसे लगा था कि जल्द ही शादी हो जाएगी। वह कहती है, “मुझे लगा था कि परिवार मुझे स्वीकार कर लेगा, लेकिन वहां मुझे अपमान ही मिला।”
कॉल्स चलती रहीं, उम्मीद टूटती रही
फरवरी से नवंबर 2025 तक प्रदीप उससे मोबाइल पर बात करता रहा। कभी प्यार से, कभी औपचारिक रूप से। लेकिन शादी का कोई फैसला नहीं आया। फिर अचानक उसने साफ कह दिया कि वह शादी नहीं करेगा। युवती कहती है, “उसने मुझे बताया भी नहीं कि वह दूसरी शादी की तैयारी कर रहा है। मुझे किसी और से पता चला।”
अब न्याय की उम्मीद
दिल टूटने के बाद युवती गढ़वा महिला थाना पहुंची। उसने आवेदन देकर पूरी बात बताई और कहा कि अगर प्रदीप शादी नहीं करना चाहता तो उसके साथ किए गए धोखे का हिसाब मिलना चाहिए। उसकी आवाज भले ही धीमी हो, लेकिन उसमें दर्द और हिम्मत दोनों हैं। उसने कहा, “मैंने बस न्याय की मांग की है। मैं चाहती हूं कि ऐसे वादों का मजाक न बनाया जाए।”
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