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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के कई गांवों में बीते दो दिनों से एक ही बात चर्चा में है। आपूर्ति विभाग की ओर से आए नोटिस ने उन घरों के दरवाजों पर दस्तक दी है, जहां सालों से सरकारी अनाज तो मिलता रहा, लेकिन उसकी पात्रता पर किसी ने सवाल नहीं उठाया। अब जैसे ही 872 कार्डधारियों को नोटिस मिला, माहौल बदला हुआ दिख रहा है। लोग आपस में बात कर रहे हैं, कुछ हिचक रहे हैं, और कुछ अपने कार्ड लेकर चुपचाप सरकारी कार्यालय जा रहे हैं।
नोटिस ने बदली रोजमर्रा की रफ्तार
अधिकतर परिवार इस बात से हैरान हैं कि इतने साल बाद अचानक कार्रवाई क्यों शुरू हुई। नोटिस में दो दिन के अंदर जवाब माँगा गया है। यह देखकर कई लोग घबरा गए क्योंकि उन्हें पहली बार एहसास हुआ कि गलत जानकारी देकर लिया गया अनाज एक दिन भारी पड़ सकता है। गांव की गलियों में अब वही लोग दिखाई दे रहे हैं जो पहले सरकारी कागजों से दूरी बनाए रखते थे।
इनकम टैक्स देने वाले से लेकर वाहन मालिक तक लिस्ट में
सूची में शामिल कई कार्डधारी ऐसे हैं, जिनके घरों के बाहर चार पहिया वाहन खड़े रहते हैं। कई लोग इनकम टैक्स और जीएसटी तक भरते हैं। कुछ छोटे उद्यम चलाते हैं। लेकिन गरीबी रेखा के नीचे वाले राशन कार्ड का फायदा वे भी उठाते रहे। यह तरीका वर्षों से चल रहा था, और किसी को लगा भी नहीं कि इसकी जांच कभी इतनी गंभीरता से होगी।
गांवों में चर्चा- ‘क्या अब पैसा लौटाना पड़ेगा?’
नोटिस में यह साफ लिखा है कि बाजार दर के हिसाब से वसूली की जाएगी, और उस पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी लगेगा। यह सुनते ही कई परिवारों को पिछली गलतियां याद आने लगीं। लोग हिसाब लगा रहे हैं कि अगर वसूली शुरू हुई तो रकम कितनी बनेगी। कई घरों में शाम की चाय के साथ यह चिंता बैठ गई है कि आने वाले दिनों में क्या कदम उठाया जाएगा।
कुछ ने तुरंत कार्ड सरेंडर करने का फैसला किया
कार्यालयों में कार्ड सरेंडर करने वालों की संख्या बढ़ गई है। कई लोग मान रहे हैं कि गलती हो गई और अब बिना और परेशानी के कार्ड जमा कर देना ही बेहतर है। किसी ने यह भी कहा कि जरूरत न होते हुए भी सरकारी अनाज लेना सही नहीं था, लेकिन अब डर लग रहा है कि कहीं बड़ी रकम न चुकानी पड़े।
विभाग की सख्ती ने दिया साफ संदेश
आपूर्ति विभाग का कहना है कि पात्रता नियमों के उल्लंघन पर अब और ढील नहीं मिलेगी। जिन लोगों ने अपनी वास्तविक आय और संपत्ति की जानकारी छुपाई, उन्हें जवाब देना होगा। विभागीय टीमों का मानना है कि इस जांच का असर आगे और कार्डधारियों पर पड़ेगा, जिससे सिस्टम अधिक पारदर्शी बनेगा।
सरकारी अनाज के हकदारों पर इसका असर
यह कार्रवाई उन परिवारों के लिए राहत की तरह देखी जा रही है, जो वास्तव में जरूरतमंद हैं। गांव की एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि सालों से कई लोग बिना हक के अनाज उठा रहे थे और वे असली जरूरतमंदों का हिस्सा खा रहे थे। अब साफ-साफ जांच हो रही है तो सही लोगों को राहत मिलेगी।
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