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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के समाहरणालय परिसर की गुरुवार दोपहर में हवा कुछ अलग थी। लोग रोज की तरह अपने काम से इधर-उधर आते-जाते दिखाई दे रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में माहौल बदलने वाला है। तभी परिसर के मेन गेट पर अचानक पुलिस की गाड़ियों का काफिला रुका और एसपी निधि द्विवेदी ने खुद उतरकर जांच शुरू कर दी। लोगों की नजरें पल भर में उनकी ओर टिक गईं, क्योंकि उस वक्त एशपी वर्दी में नहीं, सिविल ड्रेस में थीं। कई बाइक सवारों के चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी। कोई तेजी से हेलमेट पहनने लगा, कोई मोबाइल में कागजात खोजने लगा और कुछ लोग तो वहीं रुक कर हालात भांपने लगे।
ट्रिपल राइडिंग करते लड़कों को फटकार
जांच के दौरान एक बाइक पर तीन युवक आते दिखाई दिए। वे भीड़ देखकर चौंक गए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। एसपी ने उन्हें रोका और सख्त आवाज में पूछा, “ये कोई खेल का मैदान है क्या?” युवक चुप खड़े रहे। उनके चेहरों पर शर्म और डर दोनों थे। एसपी ने उन्हें समझाया कि एक छोटी सी लापरवाही उनकी और दूसरों की जान के लिए खतरा बन सकती है। उनकी आवाज भले सख्त थी, लेकिन मकसद स्पष्ट था… किसी की जिंदगी को खतरे से बचाना।
जब नियम टूटते हैं, तो खतरा बढ़ता है
परिसर में रोज दर्जनों लोग बिना हेलमेट, बिना लाइसेंस या बिना इंश्योरेंस के एंट्री करते हैं। कई लोगों के लिए यह बस कुछ मिनट की लापरवाही होती है, लेकिन इसी लापरवाही से कई घरों में रोशनी बुझ जाती है। यही वजह थी कि एसपी ने साफ कहा कि समाहरणालय कोई मिलन स्थल नहीं है। बिना काम यहां आने का मतलब अनावश्यक भीड़ और असुरक्षा बढ़ाना है।
जुर्माना सिर्फ सजा नहीं, एक संदेश भी
शाम 5:30 बजे तक 37 वाहनों पर कार्रवाई की गई और 50,100 रुपये का जुर्माना वसूला गया। सड़क सुरक्षा प्रभारी रितेश कुमार बताते हैं कि जब चालान होता है, लोग नाराज होते हैं, लेकिन कई बार यही नाराजगी उन्हें अपनी गलती समझने पर मजबूर करती है। मौके पर मौजूद एक चालक ने हौले से कहा, “गलती तो हुई थी… आगे से ध्यान रखेंगे।”
सुरक्षा सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं
जांच खत्म होते-होते माहौल पहले जैसा शांत हो गया। लेकिन कई लोग अपनी बाइक स्टार्ट करते समय एक बार फिर हेलमेट टटोलते नजर आए। कुछ ने वहीं खड़े-खड़े अपने कागजात की तस्वीरें फोन में सेव कीं, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति न आए। शायद यही एसपी की इस पूरी कार्रवाई का सबसे बड़ा असर था। एक पल की जांच ने कई लोगों के भीतर जिम्मेदारी का एहसास जगा दिया।
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