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Dhanbad : धनबाद के IIT (ISM) की इमारतें रोशनी से चमक रही थीं। छात्र, पूर्व छात्र और शिक्षक उसी गर्व के एहसास में डूबे थे, जो किसी संस्थान के सौ साल पूरे होने पर स्वाभाविक है। इसी माहौल में मंच पर आए अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी। चेहरा शांत, लेकिन आवाज ठोस और साफ। अडाणी ने अपना संबोधन यह याद दिलाने से शुरू किया कि यह संस्थान एक सोच का परिणाम था। उस दौर में भी यह समझ लिया गया था कि देश को अपने पैरों के नीचे छिपे संसाधनों को जानने और समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ज्ञान की यही बुनियाद भारत को आत्मनिर्भरता की तरफ ले जाती है। स्टेज के सामने बैठे छात्र ध्यान से सुन रहे थे। उनमें से कई माइनिंग इंजीनियरिंग के छात्र थे, जिनके लिए यह बात सीधे दिल पर उतरने वाली थी। वे जानते हैं कि देश की ऊर्जा, उद्योग और रोजमर्रा की जरूरतें जमीन के नीचे से ही निकलती हैं।

“अपनी कहानी खुद लिखो… नहीं तो कोई और लिख देगा”
अडाणी ने जब वैश्विक नैरेटिव की बात की, तो माहौल और गंभीर हो गया। उन्होंने कहा कि दुनिया में वही देश ताकतवर है जो अपनी कथा खुद तय करता है। अगर भारत यह नहीं करेगा, तो वही राष्ट्र, जिन्होंने सालों तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया, अब भारत के विकास मार्ग पर सवाल उठाएंगे। उनके शब्दों में एक चिंता थी, लेकिन साथ ही आत्मविश्वास भी। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया में सबसे कम प्रति व्यक्ति उत्सर्जन करने वाले देशों में है और नवीकरणीय ऊर्जा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गलत धारणाएँ बनाई जाती हैं। यह बात छात्रों को भी ठीक लगी, क्योंकि वे अक्सर इन चर्चाओं को सोशल मीडिया पर देखते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा की लड़ाई और विवादों के बीच खड़ी परियोजनाएं
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की कार्माइकल खदान का उल्लेख किया। यह परियोजना विरोधों में घिरी रही, लेकिन उन्हें लगता है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए यह जरूरी थी। फिर उन्होंने गुजरात के खवडा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क की बात की, जहां 30 GW की क्षमता पर काम चल रहा है। उनके मुताबिक यह सिर्फ परियोजना नहीं, बल्कि आने वाले भारत की दिशा है।

छात्रों के लिए दो नए अवसर
जब उन्होंने IIT धनबाद के लिए दो पहल की घोषणा की, तो छात्रों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। कुछ ने एक-दूसरे को देखा, मुस्कुराए, मानो उन्हें भविष्य का रास्ता दिख गया हो।
- हर साल 50 पेड इंटर्नशिप। यह उनके लिए उद्योग का दरवाजा खोल सकती है।
- नया 3एस माइनिंग एक्सलेंस सेंटर। इसमें ड्रोन से लेकर मेटावर्स तक, वह तकनीक होगी जिसका जिक्र वे क्लास में सुनते तो हैं, पर हाथों से छू नहीं पाते।
यह घोषणा सिर्फ संस्थान के लिए नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की तरह थी जो खनन, भूविज्ञान और ऊर्जा क्षेत्र में भविष्य देखते हैं।

“भारत का दूसरा स्वतंत्रता संग्राम”
अडाणी ने अपने भाषण के अंत में कहा कि भारत एक नए दौर में है। पहले स्वतंत्रता संग्राम ने हमें राजनीतिक आजादी दी थी। अब आर्थिक और संसाधन संप्रभुता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खनन को पुराने उद्योग की तरह देखा जाता है, जबकि इसी पर नई अर्थव्यवस्था की दीवार खड़ी होती है।

छात्रों को दिया भावनात्मक संदेश
अडाणी ने अपना संबोधन छात्रों को संबोधित एक सीधी अपील के साथ खत्म किया। “डर के बिना सपने देखो, लगातार मेहनत करो, नई सोच अपनाओ और देश के लिए जिम्मेदारी निभाओ।” उनकी यह बात सुनते हुए कई छात्र चुपचाप सिर हिलाते दिखे। शायद किसी को अपना करियर दिखा, किसी को अपना लक्ष्य। सौ साल पूरे कर चुके इस संस्थान में यह भाषण एक और परत जोड़ गया, वो परत, जिसे आने वाले बैच भी याद रखेंगे।

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