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Jamshedpur : जमशेदपुर के देवनगर की गलियों में वह रात आम नहीं थी। सन्नाटा था, लेकिन हवा में बेचैनी तैर रही थी। जिन चेहरों पर रोजमर्रा की थकान दिखती है, उन्हीं चेहरों के पीछे महीनों से बदले की आग सुलग रही थी। शेखर साण्डिल की हत्या अचानक नहीं हुई। यह एक तयशुदा अंत था, जिसे कदम दर कदम लिखा गया।
पुरानी रंजिश की पहली चिंगारी
करीब डेढ़ साल पहले एक विवाद ने दो परिवारों को आमने सामने खड़ा कर दिया था। थाने तक बात पहुंची, शिकायतें दर्ज हुईं और मामला दबा दिया गया। लेकिन दबा हुआ गुस्सा अक्सर शांत नहीं होता। चार से पांच महीने पहले जब शेखर कथित तौर पर राहुल सिंह के घर तक पहुंचा और गाली गलौज हुई, उसी दिन कहानी ने खतरनाक मोड़ ले लिया।
बदले की कसम
सिटी एसपी कुमार शिवाशीष बताते हैं कि पुलिस की जांच से पता चला कि इसी घटना के बाद राहुल सिंह ने फैसला कर लिया। यह फैसला सामान्य नहीं था। उसने कसम खाई कि शेखर की जान लिए बिना वह बाल नहीं कटवाएगा। राहुल ने अकेले चलने का रास्ता नहीं चुना। उसके साथ जुड़े संजय पाल और संतोष कर्माकार उर्फ खुड़ा। संतोष का आपराधिक अतीत पहले से पुलिस की फाइलों में दर्ज था। तीनों ने बैठकर योजना बनाई। रास्ते तय हुए, समय चुना गया और हथियार जुटाए गए। अवैध पिस्तौल और बाइक इस साजिश के औजार बने। जिस वक्त हमला हुआ, सब कुछ तेज था। बाइक की आवाज, अचानक निकली पिस्तौल और फिर वह क्षण जिसने एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया। देवनगर की गलियों ने बहुत कुछ देखा है, लेकिन इस रात खामोशी ज्यादा भारी थी।
पुलिस की तेज चाल
घटना के बाद पुलिस पर दबाव था। सिटी एसपी कुमार शिवाशीष की अगुवाई में टीम ने कड़ियां जोड़ीं। सीसीटीवी, तकनीकी साक्ष्य और मुखबिरों की जानकारी ने कहानी साफ करनी शुरू की। ज्यादा वक्त नहीं लगा। तीनों आरोपी गिरफ्त में आ गये। थाने के कमरे में जो कहानी सामने आई, वह ठंडी साजिश की तस्वीर थी। बदले की भावना, पुरानी दुश्मनी और अपराध की आदत ने मिलकर एक हत्या को जन्म दिया। पुलिस ने आरोपियों के पास से अवैध पिस्तौल और घटना में इस्तेमाल बाइक बरामद की। तीनों संदेही गुनहगारों को अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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