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News Samvad : आजकल लगभग हर घर में ब्लड प्रेशर मापने की मशीन मौजूद है। लोग छोटी परेशानी में भी डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद ही बीपी चेक कर लेते हैं। यह सुविधा अच्छी है, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण लोग अक्सर बीपी रीडिंग को लेकर बड़ी गलती कर बैठते हैं।
120 से ऊपर बीपी को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अधिकांश लोगों को यह पता होता है कि 120/80 mmHg को सामान्य ब्लड प्रेशर माना जाता है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब लोग 120 से थोड़ी ज्यादा रीडिंग को भी सामान्य समझ लेते हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह आदत आगे चलकर दिल, किडनी और दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
डॉक्टर ने बताया बीपी रीडिंग का सही मतलब
एक्सपर्ट ने बताया कि बीपी रीडिंग में ऊपर की संख्या को सिस्टोलिक बीपी और नीचे की संख्या को डायस्टोलिक बीपी कहा जाता है। सिस्टोलिक बीपी तब मापा जाता है जब दिल खून पंप करता है, जबकि डायस्टोलिक बीपी दिल के आराम करने की स्थिति को दर्शाता है।
एलिवेटेड बीपी क्या होता है
एक्सपर्ट के अनुसार सबसे बड़ी गलती यह है कि लोग 120 से 129 सिस्टोलिक और 80 से कम डायस्टोलिक रीडिंग को सामान्य मान लेते हैं। जबकि यह स्थिति एलिवेटेड बीपी कहलाती है। यह सामान्य बीपी से ऊपर की पहली चेतावनी होती है और बताती है कि शरीर में खतरे की शुरुआत हो चुकी है।
एलिवेटेड बीपी को हल्के में न लें
एलिवेटेड बीपी को नजरअंदाज करने से आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन हो सकता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। अच्छी बात यह है कि इस स्तर पर दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती, अगर समय रहते सावधानी बरती जाए।
जीवनशैली सुधार से कंट्रोल हो सकता है बीपी
डॉक्टर बताती हैं कि एलिवेटेड बीपी को कंट्रोल करने के लिए नियमित व्यायाम, कम नमक वाला संतुलित आहार, तनाव कम करना और वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। ये छोटे बदलाव बीपी को दोबारा सामान्य स्तर पर ला सकते हैं।
कब कहा जाता है हाइपरटेंशन
अगर किसी व्यक्ति का सिस्टोलिक बीपी 130 या उससे अधिक और डायस्टोलिक बीपी 80 या उससे अधिक हो जाता है, तो इसे हाइपरटेंशन माना जाता है। इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है और दवाओं के साथ जीवनशैली में बदलाव करना भी आवश्यक होता है।
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