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Pakur (Jaydev Kumar) : सुबह और रात की ठिठुरन अब हड्डियों तक चुभने लगी है। कोहरे की चादर ओढ़े शहर की सड़कों पर जब लोग जल्दी कदम बढ़ाते हैं, तब चौक-चौराहों पर जलता अलाव सिर्फ आग नहीं, बल्कि राहत और उम्मीद का एहसास देता है। बढ़ती ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन ने मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए राहत व्यवस्था तेज कर दी है।
चौक-चौराहों पर जलती राहत की आग
डीसी मनीष कुमार के निर्देश पर नगर परिषद क्षेत्र सहित जिले के सभी प्रखंडों में प्रमुख चौक-चौराहों, बस स्टैंड, बाजारों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। ठंड से जूझ रहे राहगीरों, दिहाड़ी मजदूरों और रात में सफर करने वालों के लिए यह अलाव कुछ पल की गर्माहट लेकर आया है।
राहगीरों और मजदूरों को मिली थोड़ी राहत
शहर के कई इलाकों में देर शाम होते ही लोग अलाव के पास रुककर हाथ सेंकते दिखते हैं। कोई अपने गंतव्य की ओर बढ़ने से पहले ठिठुरन से राहत पाता है, तो कोई देर रात की ड्यूटी पर निकला सुरक्षाकर्मी कुछ देर सुस्ताने के लिए वहीं ठहर जाता है। यह दृश्य ठंड में प्रशासन की मौजूदगी और संवेदनशीलता का अहसास कराता है।
असहायों के लिए आश्रय और कंबल का जुगाड़
सड़क किनारे और खुले आसमान के नीचे रात गुजारने वाले असहाय लोगों के लिए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। ऐसे लोगों को चिन्हित कर उन्हें आश्रय गृहों में पहुंचाने और जरूरत के अनुसार कंबल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। ठंड की रात में एक कंबल और सुरक्षित छत किसी वरदान से कम नहीं है।
स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन की अपील
इसी क्रम में डीसी मनीष कुमार ने जिलेवासियों से अपील की है कि बढ़ती ठंड को हल्के में न लें। अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़ों का उपयोग करें और बच्चों, बुजुर्गों व कमजोर लोगों का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि ठंड से जुड़ी किसी भी परेशानी में नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान से तुरंत संपर्क करें। जिला प्रशासन का कहना है कि ठंड के पूरे मौसम में राहत व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी। अलाव, आश्रय गृह और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से यह प्रयास किया जा रहा है कि पाकुड़ का कोई भी नागरिक ठंड की मार से अकेले न जूझे।
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