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Godda : गोड्डा के सुंदरपहाड़ी प्रखंड के जीतपुर गांव में वर्षों से खनन की गूंज सुनाई देती रही है। कोयले की धूल, भारी मशीनों की आवाज और रोजी रोटी की जद्दोजहद के बीच यहां के युवाओं के सपने अक्सर सीमित रह जाते थे। लेकिन आज उसी गांव में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। बच्चों और युवाओं की आंखों में चमक थी और सामने थी कंप्यूटर स्क्रीन, जो उन्हें एक नए भविष्य की ओर ले जाती दिख रही थी।
जब गांव में खुले कंप्यूटर
जीतपुर के खनन प्रभावित क्षेत्र में कंप्यूटर शिक्षा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम टेरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व के तहत शुरू किया गया है, जबकि तकनीकी सहयोग की जिम्मेदारी भाव्या फाउंडेशन ट्रस्ट निभा रहा है। गांव के लिए यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उम्मीद की एक नई शुरुआत है।
उद्घाटन बना गांव के लिए खास दिन
कार्यक्रम का उद्घाटन मुखिया दीदी और ग्राम प्रधान ने ग्रामीणों की मौजूदगी में किया। जैसे ही फीता कटा, तालियों की गूंज से माहौल भर गया। गांव के बुजुर्ग जहां इसे आने वाली पीढ़ी के लिए जरूरी कदम बता रहे थे, वहीं युवा खुद को नए दौर से जुड़ा महसूस कर रहे थे।
युवाओं के सपनों को मिला सहारा
यहां के कई युवा खनन कार्यों से सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित रहे हैं। सीमित संसाधनों के कारण पढ़ाई और तकनीकी ज्ञान उनसे दूर था। अब इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें कंप्यूटर की बुनियादी शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और जरूरी तकनीकी कौशल सिखाया जाएगा।
एक स्थानीय युवा ने कहा, अब तक हमने कंप्यूटर सिर्फ शहरों में देखा था। आज गांव में सीखने का मौका मिला है, इससे आगे की पढ़ाई और नौकरी की राह खुलेगी।

नेतृत्व और मार्गदर्शन की अहम भूमिका
कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्र महाप्रबंधक रितेश कुमार तिवारी के मार्गदर्शन में हुई है। उनका मानना है कि शिक्षा और कौशल विकास से ही खनन प्रभावित क्षेत्रों का स्थायी विकास संभव है। यह पहल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगी।
तकनीकी सहयोग से मजबूत हुई पहल
भाव्या फाउंडेशन ट्रस्ट के संयुक्त सचिव शैलेष कुमार जयसवाल ने बताया कि यह कार्यक्रम सिर्फ कंप्यूटर सिखाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करना और उन्हें डिजिटल युग के अनुरूप तैयार करना है, ताकि वे बेहतर रोजगार के अवसर हासिल कर सकें।
सामूहिक प्रयास से बदलेगी तस्वीर
कार्यक्रम में सिक्योरिटी, लैंड टीम और सीएसआर से जुड़े कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और कौशल विकास सबसे बड़ी जरूरत है। टेरी माइनिंग की ओर से आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि प्रशिक्षण और संचालन की जिम्मेदारी भाव्या फाउंडेशन निभा रहा है।
डिजिटल भविष्य की ओर बढ़ता जीतपुर
आज जीतपुर में कंप्यूटर की स्क्रीन सिर्फ मशीन नहीं हैं, बल्कि वे उन सपनों का रास्ता हैं, जो अब तक अधूरे रह गए थे। स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं में इस पहल को लेकर खास उत्साह है।
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