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Prayagraj : प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की गई, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
डीजीपी को SOP जारी करने का आदेश
न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 105 के तहत तलाशी और जब्ती की अनिवार्य रिकॉर्डिंग के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी करें।
40 मोटरसाइकिल चोरी मामला
यह टिप्पणी 40 मोटरसाइकिलों की कथित बरामदगी से जुड़े चोरी के मामले में आई। इस केस में आरोपी शादाब को जमानत देते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा कि कानून का पालन न होना पूरे अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा करता है।
वीडियोग्राफी न होने पर सवाल
कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने न तो मोटरसाइकिलों की बरामदगी की वीडियोग्राफी की और न ही जब्ती सूची तैयार करते समय कोई इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाया। जबकि नियमों के अनुसार यह अनिवार्य है।
कानून क्यों जरूरी है
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 105 निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसने से बचाने और ट्रायल के दौरान ठोस सबूत उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है।
48 घंटे में मजिस्ट्रेट को भेजना जरूरी
न्यायालय ने कहा कि तलाशी या जब्ती की वीडियो रिकॉर्डिंग को केस डायरी का हिस्सा बनाया जाना चाहिए और 48 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट को भेजा जाना अनिवार्य है।
डीजीपी का सर्कुलर, लेकिन SOP बाकी
हालांकि डीजीपी द्वारा 21 जुलाई 2025 को इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया गया था, लेकिन नियमों के अनुसार एनसीआरबी के साथ समन्वय में विस्तृत SOP अभी तक जारी नहीं हुई है।
जमानत मंजूर
कोर्ट ने वीडियोग्राफी न होने, स्वतंत्र गवाहों की कमी, जेलों में भीड़ और सह आरोपियों को पहले मिली जमानत को देखते हुए आरोपी को जमानत दे दी।
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