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Ranchi : रांची की गलियों में बीती रात आम लोगों के लिए रोज की तरह थी। घरों में नींद उतर रही थी और सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा था। लेकिन इसी सन्नाटे के बीच शहर की कुछ गलियों में मौत के सौदे तय हो रहे थे। हथियार, गोलियां और खौफ। एक छोटी सी गुप्त सूचना ने पुलिस को उस दरवाजे तक पहुंचा दिया, जिसके पीछे लंबे समय से अपराध की दुनिया धड़क रही थी।
एक सूचना और बदला गया पूरा सीन
10 जनवरी की रात करीब 10 बजे रांची पुलिस कप्तान राकेश रंजन के कानों में किसी ने फूंक मारी कि हिन्दपीढ़ी के बड़ी मस्जिद लेन में अवैध हथियारों की खरीद बिक्री होने वाली है। यह कोई आम सूचना नहीं थी। इसमें शहर की सुरक्षा और अनगिनत जिंदगियों का सवाल छुपा था। आगे का टास्क सिटी एसपी पारस राणा को सौंपा गया। सिटी एसपी पारस राणा के निर्देश पर कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय और सदर डीएसपी संजीव बेसरा के नेतृत्व में तुरंत एक विशेष टीम बनाई गई और बिना किसी शोर के तैयारी शुरू हुई।
भागते कदम और पहली गिरफ्तारी
रात करीब साढ़े ग्यारह बजे जब पुलिस की टीम बड़ी मस्जिद लेन पहुंची, तो वहां मौजूद एक शख्स पुलिस को देखते ही भागने लगा। वही पल था, जब शक यकीन में बदला। पकड़े गए व्यक्ति ने अपना नाम मो कबीर उर्फ बबलू उर्फ बोना बताया। तलाशी में जब उसके पास से पिस्टल और जिंदा गोलियां निकलीं, तो यह साफ हो गया कि मामला मामूली नहीं है। यह हथियार किसी तिजोरी में बंद रहने के लिए नहीं थे, बल्कि किसी की जान लेने के लिए तैयार थे।
एक गिरफ्तारी, कई घरों तक पहुंची पुलिस
मो कबीर की जुबां खुली और उसके साथ ही गिरोह की परतें भी खुलने लगीं। पुलिस की टीमें पुंदाग, सदर और सुखदेवनगर थाना क्षेत्र की तरफ बढ़ीं। कहीं कमरों में छुपाए गए कट्टे मिले, तो कहीं घरों के कोनों में गोलियों का जखीरा। पुंदाग थाना क्षेत्र से शाहनवाज आलम को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से एक फैक्ट्री मेड पिस्टल और 7 जिंदा गोलियां बरामद हुई। उसके साथ मौजूद अंकित कुमार के पास से एक देशी कट्टा और एक जिंदा कारतूस मिला। सदर थाना क्षेत्र से मो. सैफ उर्फ शेरा के पास से दो देशी कट्टा और 5 जिंदा कारतूस जब्त किए गए। वहीं सुखदेवनगर थाना क्षेत्र में अनुज ठाकुर के घर से एक छह चक्रिय देशी रिवॉल्वर और 77 जिंदा गोली बरामद की गई। हर बरामदगी के साथ यह अहसास गहरा होता गया कि ये हथियार अगर समय रहते न पकड़े जाते, तो किसी मां का बेटा, किसी बच्चे का पिता वापस घर न लौटता।
बिहार से रांची तक फैली खतरनाक कड़ी
पूछताछ में सामने आया कि ये हथियार बिहार के कैमूर और मुंगेर से लाए जाते थे। रास्ते बदलते थे, चेहरे बदलते थे, लेकिन मकसद एक ही था। हथियारों को अपराधियों तक पहुंचाना। रांची की सड़कों पर फैलने वाले डर के पीछे यही नेटवर्क काम कर रहा था।
अपराध का बोझ और पुराना इतिहास
पुलिस रिकॉर्ड ने बताया कि गिरोह के कुछ सदस्य पहले से ही आर्म्स एक्ट और गंभीर मामलों में आरोपी रहे हैं। यह सिर्फ कानून तोड़ने की कहानी नहीं है, बल्कि उन रास्तों की कहानी है, जहां से लौटना आसान नहीं होता। जहां हर अगला कदम इंसान को और अंधेरे में धकेल देता है।
समय रहते रुकी कई अनहोनी
पुलिस की इस कार्रवाई ने सिर्फ पांच लोगों को नहीं रोका, बल्कि उन अनगिनत घटनाओं को भी थाम लिया, जो इन हथियारों से जन्म ले सकती थीं। सिटी एसपी का साफ कहना है कि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं और अवैध हथियारों के कारोबार पर सख्ती जारी रहेगी।
सराहनीय रही इनक भूमिका
इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय, सदर डीएसपी संजीव बेसरा, सदर थानेदार कुलदीप कुमार, सुखदेवनगर थानेदार सुनिल कुमार कुशवाहा, कोतवाली थानेदार रवि कुमार सिंह, हिंदपीढ़ी थाना प्रभारी रंजीत कुमार सिन्हा, एसआई सहावीर उरांव, बजरंग टोप्पो, चन्दन वर्मा, मीनकेतन कुमार, अनुज यादव, अनांद मोहन गुप्ता, एएसआई अरूण कुमार पासवान और टेक्निकल सेल के एएसआई शाह फैसल की भूमिका सराहनीय रही।
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