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New Delhi : नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज माहौल कुछ अलग था। अलग-अलग देशों की भाषाएं, अलग-अलग संस्कृति के चेहरे, लेकिन एक साझा भावना साफ दिख रही थी। लोकतंत्र को समझने और उसे मजबूत बनाने की। मौका था भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन सम्मेलन IICDEM-2026 के शुभारंभ का।
सुबह की हलचल और उम्मीदों से भरा मंच
सुबह से ही भारत मंडपम में हलचल थी। सुरक्षा जांच के बीच जब विदेशी प्रतिनिधि अंदर पहुंचे, तो उनके चेहरे पर जिज्ञासा साफ झलक रही थी। कोई भारत के विशाल चुनावी ढांचे को समझना चाहता था, तो कोई यह जानने को उत्सुक था कि इतनी बड़ी आबादी में वोटर का भरोसा कैसे कायम रखा जाता है।
स्वागत नहीं, संवाद की शुरुआत
विशेष स्वागत समारोह में मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ करीब 60 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का अभिवादन किया। यह सिर्फ औपचारिक स्वागत नहीं था, बल्कि लोकतंत्र पर एक लंबे संवाद की शुरुआत थी।
हजार लोगों के बीच एक साझा सोच
उद्घाटन सत्र में करीब 1,000 लोग मौजूद थे। 42 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों के प्रतिनिधि, 27 देशों के राजदूत और उच्चायुक्त, देश और दुनिया के विशेषज्ञ, और भारत के 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी। इतने लोगों के बीच बैठकर भी एक बात साफ थी। हर कोई यह जानना चाहता था कि लोकतंत्र को और भरोसेमंद कैसे बनाया जाए।
दुनिया के सबसे बड़े चुनाव की कहानी
मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने जब भारत के चुनावों की बात की, तो आंकड़ों के पीछे छिपी मेहनत और जिम्मेदारी साफ महसूस हुई। उन्होंने बताया कि 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 1.5 अरब लोगों के लिए चुनाव कराना सिर्फ प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि जनता के भरोसे को संभालने की जिम्मेदारी है।
वोटर का भरोसा, सबसे बड़ी पूंजी
निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू ने मानवीय पहलू को छूते हुए कहा कि हर चुनाव के केंद्र में एक साधारण नागरिक होता है। वह यह उम्मीद लेकर मतदान करता है कि उसकी आवाज सुनी जाएगी। उन्होंने कहा कि यही भरोसा चुनाव प्रबंधन संस्थाओं की सबसे बड़ी पूंजी है।
अलग नजरिये, एक मंच
निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि IICDEM-2026 सिर्फ अधिकारियों का सम्मेलन नहीं है। यहां शोधकर्ता, छात्र और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े लोग भी हैं, जो अलग-अलग नजरिये से लोकतंत्र को देखते हैं। यही विविधता इस सम्मेलन को खास बनाती है।
लोकतंत्र का व्यापक अर्थ
IIIDEM के महानिदेशक श्री राकेश वर्मा ने सम्मेलन की थीम पर बात करते हुए कहा कि आज लोकतंत्र सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है। यह समावेश, शांति, मजबूती और भविष्य की स्थिरता से भी जुड़ा है। यही सोच IICDEM-2026 की आत्मा है।
जब पर्दे पर दिखी चुनाव की असली तस्वीर
कार्यक्रम के दौरान जब डॉक्यूसीरीज इंडिया डिसाइड्स की झलक दिखाई गई, तो हॉल में सन्नाटा छा गया। बड़े पर्दे पर चुनाव की तैयारियां, मतदान केंद्र, अधिकारी और आम लोग दिखाई दिए। वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के प्रबंध निदेशक श्री अर्जुन नोहवार ने कहा कि यह सीरीज उस संस्थान की कहानी कहती है, जो दुनिया के सबसे जटिल चुनावी काम को अंजाम देता है।
भारत से दुनिया तक लोकतंत्र का संदेश
IICDEM-2026 सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत की उस लोकतांत्रिक यात्रा का आईना है, जिसमें हर मतदाता की अहमियत है। यहां आए विदेशी प्रतिनिधियों के लिए यह समझने का मौका है कि लोकतंत्र कागजों से नहीं, लोगों के भरोसे से चलता है। और शायद यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि भी है।
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