अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
London/Ranchi : गणतंत्र दिवस का दिन, हाथों में तिरंगे की गरिमा, मन में देशभक्ति की भावना और आंखों में सम्मान के भाव… ऐसा ही एक भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन लंदन स्थित भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के ऐतिहासिक आवास पहुंचे। यह कोई औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि यह एक ऐसे नेता की भावनात्मक यात्रा थी, जो संविधान निर्माता के विचारों से प्रेरणा लेकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने का संकल्प रखता है।
मौन में छुपा सम्मान
जैसे ही सीएम हेमंत सोरेन बाबा साहेब के आवास परिसर में पहुंचे, कुछ क्षणों के लिए वे मौन हो गए। चारों ओर इतिहास की गूंज थी। वही दीवारें, जहां बैठकर बाबा साहेब ने समानता, अधिकार और न्याय की नींव रखी थी। मुख्यमंत्री ने श्रद्धा से नमन किया और कहा, “यह मेरे जीवन का सबसे भावुक क्षण है। बाबा साहेब केवल संविधान निर्माता नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की उम्मीद थे।” उनकी आंखों में गर्व भी था और जिम्मेदारी का एहसास भी।

संघर्ष से प्रेरणा तक की यात्रा
डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, मेहनत और आत्मसम्मान की मिसाल है। समाज में भेदभाव झेलते हुए भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब की यही संघर्षशील सोच आज भी उन्हें प्रेरित करती है। उन्होंने बताया कि कैसे बाबा साहेब ने देश के कमजोर, वंचित और पिछड़े वर्ग को आवाज दी और उन्हें बराबरी का अधिकार दिलाया।
गेस्ट बुक में लिखे दिल के शब्द
मुख्यमंत्री ने वहां रखी गेस्ट बुक में अपने भाव भी दर्ज किए। उनके शब्दों में श्रद्धा, कृतज्ञता और प्रेरणा साफ झलक रही थी। उन्होंने लिखा कि बाबा साहेब के आदर्श हमेशा उनके कार्यों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। यह केवल कुछ पंक्तियां नहीं थीं, बल्कि एक नेता का अपने आदर्श के प्रति समर्पण था।

साथ में परिवार, भावनाओं का सहारा
इस विशेष मौके पर मुख्यमंत्री के साथ उनकी धर्मपत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन भी मौजूद थीं। परिवार की उपस्थिति ने इस पल को और भी निजी और भावनात्मक बना दिया। मुख्य सचिव अविनाश कुमार और अंबेडकर म्यूजियम के अधिकारी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
गणतंत्र दिवस और बाबा साहेब: एक गहरा संबंध
गणतंत्र दिवस का अर्थ केवल परेड और समारोह नहीं, बल्कि उस संविधान का सम्मान है, जिसे बाबा साहेब ने बनाया। ऐसे दिन पर उनके आवास पहुंचना, संविधान के प्रति आस्था और सम्मान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा, “गणतंत्र दिवस पर यहां आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह मुझे मेरी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।”

नेतृत्व में संवेदनशीलता की झलक
इस दौरे ने यह साबित किया कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, सम्मान और सेवा का माध्यम भी हो सकती है। हेमंत सोरेन का यह भावुक क्षण दिखा गया कि जब नेतृत्व अपने आदर्शों से जुड़ता है, तब वह समाज को नई दिशा देता है।

इसे भी पढ़ें : लंदन में बोले सीएम हेमंत- अब वैल्यू एडिशन पर होगा झारखंड का फोकस

