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Girirdih : गिरिडीह की शांत पहाड़ियों के नीचे ऐसा राज छिपा होगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। पारसनाथ की तराई में जब पुलिस और सीआरपीएफ 154 बटालियन की टीम सर्च ऑपरेशन पर निकली, तो यह एक रूटीन कार्रवाई मानी जा रही थी। लेकिन कुछ घंटों बाद जमीन के भीतर से जो निकला, उसने सबको चौंका दिया। मिट्टी के अंदर गाड़कर रखा गा हथियारों का जखीरा मिला। वही हथियार, जो साल 2004 में पचम्बा गोशाला मेला के दौरान होमगार्ड कैंप से लूटे गए थे। 22 साल तक ये हथियार पहाड़ की गोद में छिपे रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी।
जंगल की खामोशी में छिपी हलचल
खुखरा थाना क्षेत्र से सटे भालकी पहाड़ी और कैनेडीह इलाके में सुरक्षाबलों ने सघन तलाशी अभियान चलाया। यह इलाका घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों से घिरा है। दिन में भी यहां सन्नाटा रहता है। टीम को कुछ संदिग्ध निशान मिले। शक गहराया तो जमीन खोदी गई। जैसे-जैसे मिट्टी हटती गई, एक-एक कर हथियार बाहर आने लगे। मौके पर मौजूद जवान भी हैरान रह गए।
जमीन के नीचे दबे थे 20 राइफल और ग्रेनेड
बरामद सामग्री की सूची लंबी है। इनमें 303 बोर की 11 सिंगल शॉट राइफल, 22 बोर की 9 राइफल, 6 हैंड ग्रेनेड, 1 ग्रेनेड प्रोजेक्टर, 1 एम्युनेशन बॉक्स, 30 चार्जर क्लिप और इलेक्ट्रिक कॉपर वायर के 2 बंडल शामिल हैं। इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों का एक साथ मिलना खुद में बड़ी बात है। सभी सामान को सावधानी से जब्त कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
2004 की घटना फिर चर्चा में
साल 2004 में पचम्बा गोशाला मेला के दौरान नक्सलियों ने होमगार्ड कैंप पर हमला कर 20 राइफल और 6 हैंड ग्रेनेड लूट लिए थे। उस समय यह घटना इलाके में सनसनी बन गई थी। लंबे समय तक इन हथियारों का कोई सुराग नहीं मिला। अब बरामदगी के बाद पुलिस पुराने केस की फाइलें फिर से खंगाल रही है। यह माना जा रहा है कि नक्सलियों ने भविष्य में इस्तेमाल के लिए इन हथियारों को सुरक्षित जगह पर छिपाकर रखा था।

पुलिस कप्तान ने दी पूरी जानकारी
गिरिडीह के पुलिस कप्तान डॉ. बिमल कुमार ने पपरवाटांड़ पुलिस लाइन में मीडिया को पूरी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त ऑपरेशन लंबे समय की खुफिया जानकारी और सतर्कता का नतीजा है। उन्होंने साफ किया कि इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
इलाके में फिर बढ़ी चौकसी
बरामदगी के बाद पारसनाथ और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जंगल और पहाड़ी इलाकों में लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चर्चा है। 22 साल बाद जमीन के नीचे से निकले इन हथियारों ने एक बार फिर याद दिला दिया कि जंगल की खामोशी के पीछे कभी-कभी बड़ा तूफान छिपा होता है। यह कार्रवाई सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।
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