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Garhwa (Nityanand Dubey) : गढ़वा की सर्द रात थी। सड़क पर ट्रकों की आवाजाही कम हो चुकी थी और झुमेलवा मोड़ के पास पुलिस की गाड़ी की लाल-नीली बत्ती दूर से चमक रही थी। रंका थाना की टीम रोज की तरह एंटी क्राइम चेकिंग में जुटी थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में एक ऐसी गिरफ्तारी होने वाली है, जिससे बिहार के चर्चित हत्याकांड का राज खुल जाएगा।
शक से शुरू हुई कहानी
बीती रात करीब साढ़े आठ बजे गढ़वा-अंबिकापुर रोड पर एक काले रंग की अपाचे बाइक आती दिखी। पुलिस ने हाथ देकर रोका। बाइक पर दो युवक सवार थे। चेहरे पर घबराहट साफ थी। कागज मांगे गए तो दोनों इधर-उधर देखने लगे। जवाब गोलमोल। पुलिस का शक गहराया। तलाशी ली गई तो मामला वहीं साफ हो गया। एक के पास लोडेड देशी पिस्टल, मैगजीन में चार जिंदा गोलियां। दूसरे के पास लोडेड कट्टा और एक जिंदा कारतूस। जेब से नकद पैसे और बाइक के कागज नदारद। यहीं से कहानी ने करवट ली।
रंग बदलकर चलते थे, पहचान छुपाकर मारते थे
थाने लाकर पूछताछ शुरू हुई। पहले तो दोनों चुप रहे, लेकिन सख्ती के बाद परतें खुलती चली गईं। फैयाज उर्फ फैज अंसारी ने बताया कि बाइक चोरी की है। असली पहचान छुपाने के लिए उसका रंग बदल दिया गया था। इसी बाइक से वे अलग-अलग जगहों पर वारदात को अंजाम देते थे। फिर जो खुलासा हुआ, उसने पुलिस को भी चौंका दिया। 30 जनवरी 2026 को बिहार के औरंगाबाद में गैलेक्सी मेडिकल के मालिक जुनैद अहमद की गोली मारकर हत्या की गई थी। यह मामला पूरे इलाके में सुर्खियों में रहा था। पुलिस महीनों से शूटरों की तलाश में थी। पूछताछ में दोनों ने उसी हत्याकांड में शामिल होने की बात कबूल कर ली।
पूर्व उग्रवादी से बना सुपारी किलर
गिरफ्तार आरोपियों में सत्यदेव यादव का नाम पहले भी कई गंभीर मामलों में सामने आ चुका है। वह पूर्व उग्रवादी रहा है। गढ़वा और आसपास के थानों में हत्या, लेवी, आर्म्स एक्ट और आगजनी के मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक, औरंगाबाद हत्याकांड में वही मुख्य शूटर था। उसका आपराधिक नेटवर्क झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ बताया जा रहा है। फैयाज अंसारी उसका साथी था, जो मौके पर फायरिंग में शामिल रहा।
एक और वारदात की थी तैयारी
पूछताछ में यह भी सामने आया कि दोनों छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक पुरुष और एक महिला की हत्या की नीयत से रेकी कर लौट रहे थे। किस वजह से और किसके इशारे पर, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि अगर उस रात पुलिस की चेकिंग न होती, तो शायद एक और बड़ी वारदात हो जाती।
गश्त ने बदली केस की दिशा
रंका थाना की टीम उस रात सामान्य गश्त पर थी। सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र कुमार यादव के साथ दो जवान मौजूद थे। एक साधारण सी चेकिंग ने अंतरराज्यीय अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। अब पुलिस इनके नेटवर्क, फंडिंग और बाकी साथियों की तलाश में जुटी है। औरंगाबाद पुलिस से भी संपर्क किया गया है ताकि केस की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
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