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Lucknow : पुरानी बस्तियों में घर सिर्फ ईंट और सीमेंट से नहीं बनते, उनमें रिश्ते भी जुड़े होते हैं। लेकिन जब दीवार ऊंची होने लगती है, तो कभी-कभी पड़ोस की दूरियां भी बढ़ जाती हैं। लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के कंघी टोला, सराय माली खां इलाके में कुछ ऐसा ही हुआ, जहां एक मकान का निर्माण धीरे-धीरे विवाद में बदल गया और फिर उस विवाद की लपटें एक पत्रकार तक पहुंच गईं।
एक मकान, कई सवाल
सैयद फहमी अली अपने मकान (हाउस नंबर 414/443) का पुनर्निर्माण करा रहे थे। परिवार बढ़ रहा था, पुराना ढांचा जर्जर हो चुका था। ऐसे में नया निर्माण जरूरी बताया गया। उनके पास रजिस्ट्री और जरूरी दस्तावेज भी थे। लेकिन जैसे ही निर्माण शुरू हुआ, कुछ पड़ोसियों ने आपत्ति जताई। किसी को दीवार की ऊंचाई पर सवाल था, तो किसी को रोशनी और हवा रुकने की चिंता। किसी को दरवाजा खोलने और बंद करने की चिंता। मोहल्ले की बातचीत धीरे-धीरे बहस में बदली और मामला प्रशासन तक पहुंच गया। एहतियात के तौर पर निर्माण रुकवा दिया गया।
जब पत्रकार ने संभालने की कोशिश की बात
इसी बीच सीनियर पत्रकार आशीष शर्मा ऋषि वहां पहुंचे। स्थानीय लोगों के अनुसार, वे किसी पक्ष में खड़े होने नहीं, बल्कि दोनों पक्षों को बैठाकर बात कराने आए थे। उनका प्रयास था कि मामला आपसी सहमति से सुलझ जाए और मोहल्ले की शांति बनी रहे। बताया जाता है कि उन्होंने समझाने की कोशिश की… “अगर किसी को नुकसान हो रहा है तो बैठकर हल निकालिए, अदालत और थाने से पहले बातचीत जरूरी है।” जब विवाद थमने के बजाय और बढ़ने लगा, तो उन्होंने खुद ही निर्माण न कराने की सलाह दी और मामले से दूरी बना ली। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
नोटिस और बढ़ती चिंता
बीते 12 फरवरी को आशीष शर्मा ऋषि को एक नोटिस जारी किया गया। इसके बाद मामला पत्रकार बिरादरी में चर्चा का विषय बन गया। जारी नोटिस के अनुसार सभी पक्षकार को आगामी 16 फरवरी को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया गया है। नोटिस के जरिये अदालत ने पूछा कि क्यों न इन लोगों से प्रति व्यक्ति 50,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और इतनी ही रकम के दो-दो बॉन्ड लिए जाए, ताकि एक साल तक शांति बनी रहे।
WJAI ने जताई गंभीर चिंता
पत्रकार को कोर्ट का नोटिस मिलने पर WJAI यानी वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया {Web Journalists’ Association of India} (यूपी चैप्टर) ने इस पर गंभीर चिंता जताई है। संस्था का कहना है कि अगर कोई पत्रकार सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए मध्यस्थता करता है, तो उसे कानूनी दबाव में लाना सही नहीं है। संस्था ने साफ कहा कि अगर निर्माण को लेकर कोई वैधानिक आपत्ति है तो उसकी जांच कानून के तहत होनी चाहिए। लेकिन संवाद की कोशिश को आपराधिक रूप देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

न्याय हो, उत्पीड़न नहीं : WJAI
यह मामला सिर्फ एक मकान या एक नोटिस का नहीं रह गया है। सवाल यह भी है कि क्या समाज में संवाद की कोशिश करने वाले लोग अब खुद विवाद का हिस्सा बनते जा रहे हैं, या यूं कहें कि उन्हें जानबूझ कर विवाद का हिस्सा बनाया जा रहा है। वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है और भरोसा जताया है कि सच्चाई सामने आएगी। संस्था का कहना है कि पत्रकार समाज का दर्पण होते हैं। अगर वही दबाव में आएंगे तो संवाद का रास्ता और संकरा हो जाएगा। न्याय हो, उत्पीड़न नहीं।
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