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Ranchi : कभी किसी के घर की देहरी पर दस्तक देने वाला, आज सड़कों पर खामोशी ओढ़े भटक रहा था। आंखों में डर, चेहरे पर थकान और कदमों में अनिश्चितता… यह कहानी है उस मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की, जो बीते एक सप्ताह से मांडर प्रखंड के मेशाल इलाके में इधर-उधर भटक रहा था। लोग देखते थे, सहमते थे, पर आगे बढ़ने की हिम्मत कम ही जुटा पाते थे। ऐसे में इंसानियत का हाथ बढ़ा और वह हाथ था कानून के साथ-साथ करुणा को साधने वाले सिस्टम का।
जब गांव की चिंता बनी एक पुकार
मेशाल और आसपास के गांवों में यह व्यक्ति रोज दिखता। कभी खेतों की मेड़ पर बैठा, कभी सड़क किनारे बेसुध। उसकी हालत देखकर स्थानीय लोग चिंतित थे। कहीं वह खुद को या किसी और को नुकसान न पहुंचा दे। इसी दौरान पीएलवी सुमन ठाकुर की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने समझा कि यह मामला सिर्फ कानून का नहीं, इंसानियत का है।
एक फोन कॉल, और बदल गई दिशा
सुमन ठाकुर ने तुरंत रांची डालसा के सचिव राकेश रौशन और मांडर थानेदार को सूचना दी। बात गंभीर थी और प्रतिक्रिया भी वैसी ही। बिना देर किए जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई गई। पुलिस और डालसा की टीम साथ आई क्योंकि यहां आदेश नहीं, उम्मीद जरूरी थी।
निर्देश ऊपर से, संवेदना नीचे तक
यह पूरी पहल न्यायामूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष झालसा सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश पर आगे बढ़ी। सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना और न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में, डालसा सचिव राकेश रौशन ने त्वरित टीम गठित की। पीएलवी सुमन ठाकुर, भारती शहदेव और विनीता कुमारी को साफ निर्देश मिला… इलाज पहले, देरी नहीं।
रिनपास की दहलीज पर मिली राहत
टीम शख्स को अपनी हिफाजत में लेकर रिनपास पहुंची। यहां उसकी भर्ती हुई और पहली बार उसके चेहरे पर बेचैनी के बीच राहत की झलक दिखी। सड़कों की अनदेखी से निकलकर अस्पताल की देखरेख तक का यह सफर छोटा था, पर मायने बड़े।
कानून, जो करुणा बन जाए
यहां याद दिल दें कि रांची डालसा अक्सर मुफ्त कानूनी सहायता के लिए जाना जाता है। लेकिन यह घटना बताती है कि जब कानून करुणा का रूप ले ले, तो वह जिंदगियां संवार देता है। डालसा सचिव राकेश रौशन ने कहा कि इलाज के दौरान और उसके बाद भी हर जरूरी मदद जारी रहेगी।
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