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Patna : बिहार की बढ़ती बिजली जरूरतों को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकार ने परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापना की प्रक्रिया तेज कर दी है। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने राज्य में संभावित स्थानों का प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया है। पटना स्थित विद्युत भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एनटीपीसी और एनपीसीआईएल की टीमों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। बैठक की अध्यक्षता ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने की।
बांका के दो इलाके सबसे उपयुक्त
तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार बांका जिले के शंभूगंज और भितरिया क्षेत्र परियोजना के लिए सबसे बेहतर पाए गए हैं। इन इलाकों की आबादी कम है और जमीन पथरीली होने के कारण भारी निर्माण कार्य के लिए अनुकूल मानी गई है। सर्वे में यह भी बताया गया कि ये दोनों स्थान नवादा के रजौली और सिवान जिले में चिन्हित क्षेत्रों की तुलना में अधिक उपयुक्त हैं। हालांकि सिवान में भी सर्वे जारी है, लेकिन वहां भूकंपीय जोन होने के कारण अतिरिक्त सुरक्षा जांच की आवश्यकता होगी।
जल आपूर्ति बनी सबसे बड़ी चुनौती
परमाणु संयंत्र के संचालन में रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए लगातार बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। चयनित स्थलों पर फिलहाल स्थायी जल स्रोत उपलब्ध नहीं है, इसलिए जल आपूर्ति को लेकर दो विकल्पों पर चर्चा हो रही है। पहला विकल्प गंगा नदी से पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाना है। दूसरा विकल्प नेपाल से आने वाली नदियों पर बड़े जलाशय विकसित करना है। अधिकारियों का मानना है कि गंगा जल सबसे विश्वसनीय स्रोत साबित हो सकता है।
औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में बिहार में प्रस्तावित यह संयंत्र राज्य के औद्योगिकीकरण को गति दे सकता है। साथ ही राष्ट्रीय ऊर्जा ग्रिड को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। यदि परियोजना आगे बढ़ती है तो बिहार ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।
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