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Home » देवघर का बेटा, झारखंड का भरोसा : युवा अधिवक्ता ललित यादव की शानदार जीत
झारखंड

देवघर का बेटा, झारखंड का भरोसा : युवा अधिवक्ता ललित यादव की शानदार जीत

April 18, 2026No Comments5 Mins Read
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Ranchi : चुनाव सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं होता। कई बार यह उस भरोसे की परीक्षा होती है, जो लोग किसी चेहरे पर करते हैं। झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव में इस बार ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब देवघर के 36 वर्षीय युवा अधिवक्ता ललित यादव ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरे राज्य में उनकी चर्चा होने लगी। मतगणना आगे बढ़ी तो एक बात साफ होती गई कि यह सिर्फ जीत नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं की उम्मीदों का फैसला है। ललित यादव ने न सिर्फ निर्धारित जीत कोटा पूरा किया, बल्कि पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल कर एक मजबूत संदेश भी दे दिया कि झारखंड का अधिवक्ता समाज अब नए नेतृत्व को भी उतनी ही गंभीरता से स्वीकार कर रहा है।

देवघर की गलियों से हाई कोर्ट तक की पहचान

देवघर को लोग आमतौर पर बाबा बैद्यनाथ धाम की वजह से जानते हैं। यहां श्रद्धा है, भीड़ है, और आस्था की हवा है। लेकिन इसी देवघर से निकले ललित यादव ने यह दिखा दिया कि यह शहर अब सिर्फ धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं, बल्कि यहां से नेतृत्व भी निकल सकता है। ललित यादव झारखंड हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। उम्र भले 36 साल है, लेकिन उनके काम करने के तरीके में एक ठहराव और समझ दिखाई देती है। यही वजह रही कि जब उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो बहुत से लोगों को लगा कि यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत हो सकती है।

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पहली बार चुनाव, लेकिन हौसला पुराने खिलाड़ियों जैसा

बार काउंसिल चुनाव आसान नहीं होता। यहां हर वोट के पीछे किसी न किसी की उम्मीद होती है। हर अधिवक्ता चाहता है कि जिसे वह वोट दे, वह सिर्फ भाषण देने वाला नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर साथ खड़ा होने वाला इंसान हो। ललित यादव के सामने चुनौती बड़ी थी। क्योंकि मैदान में 100 प्रत्याशी थे, अनुभवी चेहरे थे, पुराने सदस्य थे, और कई बड़े नाम भी थे। लेकिन उन्होंने चुनाव को सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अलग-अलग जिलों में जाकर अधिवक्ताओं से मुलाकात की, उनकी बात सुनी और सबसे जरूरी यह कि उन्हें यह एहसास कराया कि वे अकेले नहीं हैं। यही संवाद धीरे-धीरे समर्थन में बदलता गया।

मतगणना के दौरान बढ़ता गया उत्साह

जब मतगणना शुरू हुई, तब तक किसी को यह अंदाजा नहीं था कि पहली बार चुनाव लड़ने वाला यह युवा अधिवक्ता इतनी बड़ी जीत की तरफ बढ़ जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे वोटों की गिनती होती गई, ललित यादव का नाम ऊपर चढ़ता गया। रांची से लेकर कोल्हान तक, संथाल परगना से लेकर पलामू तक, कई इलाकों में उनका प्रदर्शन मजबूत रहा। उनके समर्थकों का कहना है कि इस चुनाव में अधिवक्ताओं ने सिर्फ चेहरा नहीं देखा, बल्कि उस व्यक्ति को देखा जो उनसे जुड़कर चलता है।

जीत का कोटा और ललित यादव की बड़ी उपलब्धि

झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव में जीत के लिए 677 वोट का कोटा तय किया गया था। जो भी उम्मीदवार इस आंकड़े तक पहुंच जाता है, वह स्वतः निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। इस चुनाव में सबसे पहले अब्दुल कलाम रसीदी ने कोटा पूरा किया और जीत दर्ज की। इसके बाद ललित यादव ने भी कोटा पूरा करते हुए जीत हासिल कर ली। ललित यादव की जीत इसलिए भी खास रही, क्योंकि वे पहली बार चुनाव लड़ रहे थे और फिर भी उन्होंने राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया।

“यह जीत मेरी नहीं, अधिवक्ता समाज की है”

जीत के बाद ललित यादव की आवाज में खुशी जरूर थी, लेकिन उससे ज्यादा उनके शब्दों में जिम्मेदारी दिखी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला चुनाव था और उन्हें लगभग हर जगह से भरपूर समर्थन मिला। ललित यादव ने कहा कि संथाल परगना से लेकर पलामू, कोडरमा, चाईबासा और कोल्हान तक अधिवक्ता साथियों ने उन्हें प्रथम वरीयता का वोट दिया। जहां प्रथम वरीयता थोड़ा कम रहा, वहां दूसरी वरीयता में भारी समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि जिस भरोसे के साथ अधिवक्ताओं ने उन्हें चुना है, वे उस भरोसे पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। उनका एक वाक्य कई अधिवक्ताओं के दिल को छू गया, जब उन्होंने कहा कि यह जीत अधिवक्ता समाज की जीत है।

100 प्रत्याशी, 23 सीटें और कड़ा मुकाबला

इस बार के चुनाव में मुकाबला बेहद कड़ा रहा। कुल 23 सदस्यों का चयन होना था।

  • 18 पुरुष अधिवक्ता
  • 5 महिला अधिवक्ता

इस चुनाव में कुल 100 प्रत्याशियों ने नामांकन किया।

  • 75 पुरुष प्रत्याशी
  • 25 महिला प्रत्याशी

इतने बड़े मैदान में अपनी पहचान बनाकर दूसरा स्थान हासिल करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा।

महिला सीटों पर भी तस्वीर साफ

महिला अधिवक्ताओं के लिए भी सीटें आरक्षित थीं। इस बार महिला प्रत्याशियों में कोई भी उम्मीदवार निर्धारित कोटा तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद अंतिम चरण में 20 महिला प्रत्याशी बाहर हो गईं और बची हुई 5 महिला प्रत्याशियों को निर्वाचित घोषित किया गया।

12 मार्च को हुआ मतदान, 37 बार एसोसिएशन में वोटिंग

इस चुनाव के लिए 12 मार्च को पूरे झारखंड में मतदान कराया गया था। राज्य के 37 बार एसोसिएशन में एक साथ वोट डाले गए। राज्य में कुल 25,001 अधिवक्ता मतदाता हैं। इतनी बड़ी संख्या में वोट पाकर जीत दर्ज करना बताता है कि ललित यादव को व्यापक समर्थन मिला है।

देवघर में जश्न, समर्थकों में भावुकता

देवघर में जैसे ही यह खबर पहुंची कि ललित यादव ने राज्य में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है, वहां अधिवक्ता साथियों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। कुछ लोगों ने इसे देवघर के लिए गर्व का पल बताया। कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि यह जीत देवघर की पहचान को एक नई दिशा देगी। देवघर के लोगों के लिए यह सिर्फ चुनाव परिणाम नहीं, बल्कि यह संदेश है कि उनका शहर अब हर मंच पर अपनी आवाज दर्ज करा सकता है।

इसे भी पढ़ें : रात की गश्ती से लेकर खनन माफिया तक, एसपी निधि का एक्शन प्लान तैयार

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