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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : सुबह की ठंडी हवा में तीन बजे ही होलिका दहन की आग ने पूरे इलाके को रोशनी और उत्साह से भर दिया। यह आग सिर्फ लकड़ियों की जलती हुई चिंगारी नहीं थी, बल्कि लोगों के दिलों में उमंग और होली की खुशियों की पहली लपट थी।
राख से तिलक, और दिलों में प्रेम
होलिका दहन के बाद लोग राख लेकर घर-घर गए। छोटे बच्चे अपनी नानी-दादी की हाथों में राख लगाकर तिलक कर रहे थे, तो बुजुर्ग अपने पोते-पोतियों को आशीर्वाद दे रहे थे। किसी के चेहरे पर हल्की मुस्कान, किसी के आंखों में चमक, यह दृश्य यह बता रहा था कि त्योहार सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि रिश्तों और अपनापन का भी जश्न है।

गुलाल की बारिश और हंसी की गूंज
सकून और खुशी का असली रंग तब देखने को मिला जब लोग गली-मुहल्लों में एक-दूसरे पर गुलाल फेंकने लगे। छोटे बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी रंगों में रंग गए। कभी किसी के गाल पर हल्का गुलाल, कभी किसी के हाथ में थामे रंग का डिब्बा… हर जगह हंसी और खुशी की गूंज थी। युवाओं ने डीजे पर डांस किया, और कुछ स्थानों पर पारंपरिक फगुआ गीतों की आवाजें भी गूंज रही थीं। हर मोड़ पर बच्चों की हँसी और बड़ों की मुस्कान ने यह दिखा दिया कि रंगों में बँधा त्योहार सबको जोड़ता है।

स्वाद और मिठास से भरी रंगीनियां
होली सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं रही। घर-घर में बने लजीज पकवान और मीठे व्यंजन हर चेहरे पर मिठास घोल रहे थे। बच्चों के हाथों में पकोड़े और गुजिया, और बुजुर्गों के हाथों में चाय की प्याली… सब मिलकर त्योहार का अनुभव और भी यादगार बना रहे थे।
सुरक्षा में भी दिखा उत्साह
पुलिस और प्रशासन के जवान भी उत्सव का हिस्सा बने। उन्होंने गली-मुहल्लों में सुरक्षा का ध्यान रखते हुए खुद भी गुलाल लगाकर लोगों को होली की शुभकामनाएं दी। उनके चेहरे पर मुस्कान और आम जनता के साथ बांटा गया रंग यह साबित कर रहा था कि उत्सव और सुरक्षा साथ-साथ चल सकते हैं।

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