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Home » बुढ़मू की बेटी के साथ दरिंदगी… अब ढाल बनकर खड़ा हुआ झालसा
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बुढ़मू की बेटी के साथ दरिंदगी… अब ढाल बनकर खड़ा हुआ झालसा

March 6, 2026No Comments4 Mins Read
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झालसा
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Ranchi : रांची जिले के बुढ़मू प्रखंड के एक छोटे से गांव हथनाई में रहने वाली एक किशोरी की जिंदगी कुछ दिनों पहले एक दर्दनाक हादसे से गुजर गई। गांव के ही एक युवक पर उसके साथ दरिंदगी करने का आरोप है। इस घटना ने न सिर्फ उस परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। लेकिन इस अंधेरे के बीच अब उम्मीद की एक किरण दिखाई दे रही है। झालसा झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने और हर संभव मदद देने का फैसला किया है।

अखबार की खबर बनी सहारा की वजह

इस घटना की खबर जब अखबारों में प्रकाशित हुई, तो इसे पढ़कर झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) के न्यायामूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष सुजीत नारायण प्रसाद ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना को निर्देश दिया कि पीड़िता को तत्काल कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कार्रवाई की जाए। इसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) रांची के न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा-1 के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई।

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जब गांव पहुंची मदद की टीम

आज यानी 6 मार्च को डालसा की टीम बुढ़मू प्रखंड के हथनाई गांव पहुंची। टीम का नेतृत्व डालसा सचिव राकेश रौशन कर रहे थे। टीम में डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा, सहायक एलएडीसी पंकज कुमार शर्मा के साथ पीएलवी बंधु उरांव, दीपक मुंडा, सिकंदर मुंडा, सादिक अली, अनिल ठाकुर और काजल कुमारी शामिल थे। गांव के उस छोटे से घर में जब अधिकारी पहुंचे, तो वहां दर्द और चिंता का माहौल साफ महसूस किया जा सकता था। टीम ने पीड़िता और उसके परिवार से लंबी बातचीत कर पूरी घटना की जानकारी ली और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं।

गरीब परिवार, बड़ी जिम्मेदारियां

पीड़िता के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। परिवार में माता-पिता के साथ एक भाई और तीन बहनें हैं। घर की जिम्मेदारी उठाने के लिए पीड़िता के पिता झारखंड से दूर बिहार के बक्सर में मजदूरी करते हैं। घर में रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही परिवार के लिए बड़ी चुनौती है।

मुआवजा और सरकारी योजनाओं की पहल

डालसा की टीम ने पीड़िता से पीड़ित मुआवजा योजना के तहत आवेदन भी लिया है। अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होते ही उसे मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही परिवार को राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए भी आवेदन लिया गया है। टीम ने यह भी भरोसा दिलाया कि परिवार को इंदिरा आवास योजना का लाभ दिलाने की कोशिश की जाएगी, ताकि उन्हें रहने के लिए बेहतर घर मिल सके।

न्याय की लड़ाई में मिलेगा मुफ्त वकील

पीड़िता को अदालत में न्याय दिलाने के लिए डालसा की ओर से निःशुल्क पैनल अधिवक्ता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। अधिकारियों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया में किसी भी तरह की आर्थिक या तकनीकी बाधा पीड़िता के रास्ते में नहीं आने दी जाएगी।

पढ़ना चाहती है आगे

सबसे मार्मिक पल तब आया, जब बातचीत के दौरान पीड़िता ने अपनी एक छोटी-सी इच्छा जताई। उसने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है। पीड़िता अभी नौवीं कक्षा तक पढ़ चुकी है और आगे भी पढ़कर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है। टीम के सदस्यों ने उसे भरोसा दिलाया कि उसकी पढ़ाई रुकने नहीं दी जाएगी और हर संभव मदद की जाएगी।

मेडिकल जांच में भी मिली मदद

मामले में पीड़िता का मेडिकल चेकअप कराने में डालसा के पीएलवी ऋषभ जायसवाल ने अहम भूमिका निभाई। डालसा अधिकारियों का कहना है कि पीड़िता को न्याय दिलाने और उसके परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए आगे भी लगातार निगरानी की जाएगी। इस किशोरी की जिंदगी पर लगे इस घाव को भरने में शायद समय लगे, लेकिन अब उसके साथ न्याय और उम्मीद की एक मजबूत लड़ाई शुरू हो चुकी है।

इसे भी पढ़ें : स्कूल छूटा, खेल छूटा, ‘अपनों’ के चलते बचपन छूटा… फिर हुई डालसा की एंट्री

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