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Ranchi : कभी-कभी खबरें सिर्फ घटनाएं नहीं होतीं, बल्कि समाज के सामने आईना बनकर खड़ी हो जाती हैं। रांची में सामने आई दो कहानी भी कुछ ऐसी ही है… दर्द, बेबसी और सवालों से भरी हुई। एक 15 साल की नाबालिग बच्ची, जो मानसिक रूप से अस्थिर है और 8 महीने की गर्भवती है। उसे यह तक नहीं पता कि वह कौन है, उसका घर कहां है, या उसकी कोख में पल रहा बच्चा किसका है। दूसरी ओर, रेलवे स्टेशन के पास बेसुध पड़ी एक गर्भवती महिला, जो होश में आने के बाद बस इतना बता पाती है कि वह ओडिशा की रहने वाली है। दोनों की कहानी अलग है, लेकिन दर्द एक जैसा… अकेलापन, असुरक्षा और पहचान।
एक बच्ची… जिसे अपना नाम तक याद नहीं
15 साल की वह बच्ची अब अस्पताल के एक कमरे में है। उसकी आंखों में मासूमियत है, लेकिन उनमें गहरा खालीपन भी है। जब उससे पूछा जाता है… “तुम्हारा नाम क्या है?” वह बस चुप हो जाती है। … “घर कहां है?” वह इधर-उधर देखने लगती है, जैसे कोई याद ढूंढ रही हो जो कहीं खो चुकी है। डॉक्टर बताते हैं कि बच्ची मानसिक रूप से अस्थिर है और करीब आठ महीने की गर्भवती है। यह सोचकर ही दिल दहल जाता है कि इतनी छोटी उम्र में उसकी जिंदगी किस दर्द से गुजर रही होगी।
रेलवे स्टेशन के पास मिली एक और अधूरी कहानी
दूसरी महिला की कहानी भी उतनी ही दर्दनाक है। रांची रेलवे स्टेशन के पास जब लोग अपने काम में व्यस्त थे, तभी एक महिला अचेत अवस्था में जमीन पर पड़ी मिली। आसपास के लोगों ने देखा तो किसी ने पानी दिया, किसी ने पुलिस को सूचना दी। जब उसे अस्पताल लाया गया और होश आया, तो उसने धीमी आवाज में बस इतना कहा… “मैं ओडिशा से आई हूं…”इसके आगे वह कुछ साफ नहीं बता पाई। वह भी करीब 9 महीने की गर्भवती है। उसके चेहरे पर थकान, डर और अनगिनत अनकहे सवाल साफ दिखाई देते हैं।
जब इंसानियत ने आगे बढ़कर थामा हाथ
इन दोनों मामलों की जानकारी डालसा सचिव राकेश रौशन के कानों तक पहुंची। उन्होंने बिना देर किये आपनी सीनियर्स तक ये बात पहुंचाई। झालसा यानी झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजित नारायण प्रसाद के निर्देश पर तुरंत कार्रवाई की गई। सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना और रांची के न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में डालसा सचिव ने अलग-अलग दो टीमों का गठन किया। दोनों टीमें दोनों पीड़िताओं के पास तुरंत मदद के लिए पहुंच गयी। सचिव राकेश रौशन की देखरेख में टीम ने पहले दोनों पीड़िताओं का रिम्स और रिनपास में इलाज शुरू कराया और उनके रहने-खाने की व्यवस्था की। नाबालिग बच्ची के मामले में डालसा सचिव ने बताया कि रांची में ऐसे मामलों में लंबे समय तक रखने के लिए कोई संस्था उपलब्ध नहीं है। इसलिए सीडीपीओ वेद प्रकाश तिवारी से बातचीत और पत्राचार कर बच्ची को एमओसी धनबाद में रखने की प्रक्रिया शुरू की गई है। डालसा सचिव का कहना है कि इन दोनों की देखभाल और इलाज अब पूरी तरह प्रशासन की निगरानी में होगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित संस्थानों में भी रखा जाएगा।



