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Lucknow : भौतिकी के नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने बुधवार सुबह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का बड़ा केंद्र बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से बातचीत हुई। बैठक में लोहम के सीईओ रजत वर्मा और कंपनी के चीफ ऑफ स्टाफ आयुष सबात भी मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में निवेश के बेहतर माहौल की सराहना की और यहां तकनीक आधारित उद्योगों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
प्रदेश में लग सकती है “रेयर अर्थ टू मैग्नेट” फैसलिटी
बैठक के दौरान लोहम कंपनी ने उत्तर प्रदेश में भारत की पहली “रेयर अर्थ टू मैग्नेट” इंटीग्रेटेड फैसलिटी स्थापित करने की योजना पर भी चर्चा की। अगर यह परियोजना शुरू होती है तो देश में उच्च तकनीक आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को भी फायदा होने की उम्मीद है।
ग्रैफीन की खोज से मिली वैश्विक पहचान
कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव दुनिया भर में ग्रैफीन की खोज के लिए जाने जाते हैं। इसी खोज के लिए उन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था। फिलहाल वे लोहम कंपनी के साथ स्ट्रैटेजिक सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य मटेरियल साइंस की नई तकनीकों को उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र में उपयोगी बनाना है।
नई पीढ़ी की बैटरियों और रीसाइक्लिंग पर फोकस
लोहम और नोवोसेलोव के सहयोग का मुख्य फोकस दो क्षेत्रों पर है। पहला, टूडी मटेरियल जैसे ग्रैफीन का इस्तेमाल कर अगली पीढ़ी की लिथियम आयन बैटरी को ज्यादा सुरक्षित, अधिक क्षमता वाली और लंबे समय तक चलने वाली बनाना। दूसरा, बैटरियों और परमानेंट मैग्नेट के लिए उन्नत रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित करना ताकि महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर रिकवरी हो सके और संसाधनों का दोबारा उपयोग बढ़े।
ग्रीन एनर्जी और मेक इन इंडिया को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं देश में तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करेंगी। साथ ही यह पहल मेक इन इंडिया और ग्रीन एनर्जी के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकती है। अगर उत्तर प्रदेश में एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का बड़ा केंद्र बनता है तो राज्य तकनीक आधारित उद्योगों के लिए एक अहम हब बन सकता है।
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