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Lucknow : उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र में पूछे गए एक सवाल को लेकर उठे विवाद परसीएम योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। रविवार सुबह उन्होंने सभी भर्ती बोर्डों के अध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि परीक्षा से जुड़े सवालों में किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या समुदाय की आस्था और मर्यादा का ध्यान रखा जाए।
विवादित सवाल पर सरकार की सख्ती
सीएम ने कहा कि प्रश्न पत्र तैयार करते समय ऐसी कोई टिप्पणी या शब्द इस्तेमाल नहीं होना चाहिए जिससे किसी की भावनाएं आहत हों। उन्होंने सभी भर्ती बोर्डों को निर्देश दिया कि पेपर सेट करने वाले विशेषज्ञों को भी इस बारे में साफ तौर पर दिशा-निर्देश दिए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति बार-बार ऐसी गलती करता है या जानबूझकर विवादित सामग्री शामिल करता है तो उसे तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी ने सभी भर्ती बोर्ड के चेयरपर्सन्स को परीक्षा प्रक्रिया की मर्यादा एवं संवेदनशीलता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ अथवा संप्रदाय की आस्था एवं गरिमा के संबंध में किसी भी प्रकार की…
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) March 15, 2026
पेपर सेटर्स के एमओयू में भी होगा प्रावधान
सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि इस नियम को पेपर सेटर्स के साथ होने वाले एमओयू में भी शामिल किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
‘पंडित’ शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद
दरअसल, शनिवार को आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र में एक सवाल में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। सोशल मीडिया पर इस सवाल को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई। भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने भी इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे अनुचित बताया।
मामले को लेकर सरकार सतर्क
मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया। सीएम ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में ऐसी कोई भी चीज नहीं होनी चाहिए जो किसी वर्ग की भावना को ठेस पहुंचाए। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी भर्ती बोर्डों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
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